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मालवा का रामदेवरा पर मेला 29 को, 2 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
कचनारा बाबा रामदेव के यू तो पूरे देश में अनगिनत मंदिर है और प्रत्येक मंदिर से आस्था जुड़ी है। किंतु इनमें से कुछ स्थल ऐसे हैं जिन्हें आध्यात्मिक चिकित्सालय माना जाता है। जिले के कचनारा में स्थित बाबा रामदेव मंदिर पर भी इसी कारण आस्था लोगों की जुड़ी है। मंदसौर सुवासरा से २५ किमी दूर मुख्य सडक़ मार्ग पर यह स्थान है
कचनारा बाबा रामदेव के यू तो पूरे देश में अनगिनत मंदिर है और प्रत्येक मंदिर से आस्था जुड़ी है। किंतु इनमें से कुछ स्थल ऐसे हैं जिन्हें आध्यात्मिक चिकित्सालय माना जाता है। जिले के कचनारा में स्थित बाबा रामदेव मंदिर पर भी इसी कारण आस्था लोगों की जुड़ी है। मंदसौर सुवासरा से २५ किमी दूर मुख्य सडक़ मार्ग पर यह स्थान है। यहां पर वर्षों से चरणों की पूजा होती आई है और चरणों की पूजा से ही कई लोगों को असाध्य रोगों से मुक्ति मिली है। टेकरी पर पूरा परिसर हरियाली से सरोबार है। यहां 29 अगस्त को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियां जोंरो पर है। पिछले दो सालों में कोविड की पाबंदियों के कारण मेला नहीं लगा था। इस बार मेले को लेकर अपार उत्साह है। इस बार २ लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान बताया जा रहा है। वैसे तो प्रतिवर्ष 1 लाख से भी अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन करते हैं। कोरोना काल मे मेला स्थगित होने के बावजूद भी हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए थे।
बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण के पूर्व दिशा में प्रारंभिक अवस्था के प्राचीन समय के पुजारी उधानाथ की समाधि है। जहां माथा टेकने एवं परिक्रमा करने की परंपरा प्रचलित है। ठीक मुख्य ग्रह एवं समाधि के बीच में यज्ञशाला है जो की मूर्ति स्थापना के समय पूर्व कि यज्ञशाला बनाकर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को पूर्ण किया गया था। इस महोत्सव की स्मृति में इस यज्ञशाला की स्थापना हुई। उधर दक्षिण दिशा में अलग-अलग समाजों द्वारा धर्मशाला बनाई हुई है। साथ ही पास में समिति द्वारा भोजनशाला का निर्माण किया गया है। उत्तर दिशा में मुख्य सडक़ मार्ग से लगभग 101 सीढिय़ां चढक़र मंदिर तक पहुंचा जाता है। सीढिया मुख्य मंदिर के बीच एक बाबा की धूनी है जहां पर भजन कीर्तन किया जाता है। पिछले कई वर्षों से अखंड ज्योति जलाई जा रहे हैं। ***** सुदी बीज को मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में दूरदराज से श्रद्धालु लोटन यात्रा व पैदल बाबा के जयकारे के साथ दर्शन करने आते हैं।
वर्तमान में 29 अगस्त को बाबा रामदेव मंदिर टेकरी पर मेले का आयोजन किया जाएगा जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने आएंगे। मालवा का रामदेवरा कहा जाता है। 29 अगस्त की रात्रि में भजन संध्या का भी आयोजन किया जाएगा। बाबा रामदेव का मेला एक दिवसीय ही रहता है किंतु मेला पर्यंत दिवस से 1 दिन पहले 1 दिन बाद भी श्रद्धालुओं का जमघट बना रहता है। मेले को लेकर यहां दुकानें सज चुकी है और तैयारियंा भी अंतिम दौर में है। मंदिर समिति जहां श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रेलिंग सहित अन्य व्यवस्था जुटा रही हैं। वहीं मेले में झूले चकरिया भी लग गई है। मंदिर परिसर में अस्थाई रेलिंग भी बनाई गई है।

1999 स्थानीय समिति द्वारा मंदिर जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ। इसके बाद राजस्थान के पिंडवाड़ा गांव के कारीगरों ने मूर्ति स्थापना का काम किया। मूर्ति का भार करीब 2 क्विंटल है। मूर्ति स्थापना वैशाख सुदी पूर्णिमा 23 मार्च 2005 में हुई। मान्यता है कि जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिलता यह महिलाएं मंदिर परिसर में स्थित वृक्ष पर पालने बांधती है। और मनोकामना पूरी होती है। इसी कारण यहां दूरस्थ जगहों से लोग पहुंचते है।



