बाल-बाल बचे डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया, लंदन से लौटते वक्त हेलीकॉप्टर की करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग; जानिए क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया को ब्रिटेन दौरे से लौटते समय उस वक्त मुश्किल का सामना करना पड़ा, जब उनके हेलिकॉप्टर ‘मरीन वन’ में तकनीकी खराबी आ गई। व्हाइट हाउस की ओर से घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी खराबी की वजह से हेलिकॉप्टर की बीच उड़ान में ही इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। इसके बाद ट्रंप अपनी पत्नी के साथ दूसरे हेलिकॉप्टर से रवाना हुए।

घटना उस समय हुई जब ट्रंप दंपति ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात के बाद चेकर्स (प्रधानमंत्री का कंट्री हाउस) से स्टैनस्टेड एयरपोर्ट जा रहे थे। यह 20 मिनट का सफर था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद पायलटों को हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी का पता चला। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पायलटों ने तुरंत नजदीकी एयरफील्ड पर हेलिकॉप्टर को सुरक्षित उतार लिया।

ट्रंप के हेलिकॉप्टर की क्यों हुई इमरजेंसी लैंडिंग
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रथम महिला को एक सहायक हेलीकॉप्टर में सवार होना पड़ा और यूनाइटेड किंगडम के स्टैनस्टेड हवाई अड्डे पर उनके आगमन में देरी हुई। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि जिस हेलीकॉप्टर से डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया यात्रा कर रहे थे, उसमें हाइड्रोलिक समस्या आ गई और उसे एक स्थानीय हवाई अड्डे पर उतरना पड़ा।
मरीन वन में अचानक आई तकनीकी खराब
इसके बाद ट्रंप और मेलानिया को बैकअप हेलिकॉप्टर से स्टैनस्टेड एयरपोर्ट ले जाया गया, जहां से उन्होंने एयर फोर्स वन से अमेरिका के लिए उड़ान भरी। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने बताया कि यह कोई बड़ा खतरा नहीं था, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से तत्काल लैंडिंग का फैसला लिया गया। राष्ट्रपति ट्रंप, मेलानिया और अन्य स्टाफ पूरी तरह सुरक्षित हैं। मरीन वन को तकनीकी जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया है।
ब्रिटेन के दो दिवसीय दौरे पर थे ट्रंप
बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया दो दिवसीय ब्रिटेन के राजकीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री स्टार्मर से मुलाकात की और किंग चार्ल्स द्वारा आयोजित राजकीय भोज में हिस्सा लिया। यह घटना उनके दौरे के आखिरी पड़ाव पर हुई। इस दौरे पर ट्रंप ने पीएम स्टार्मर के साथ यूक्रेन, गाजा और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने एक नई टेक्नोलॉजी डील भी की, जिसमें अमेरिकी कंपनियां यूके में 150 अरब पाउंड का निवेश करेंगी।



