बागपत: रसोई गैस के संकट से गुरुकुल में बुझा चूल्हा, चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हुए 50 बटुक

बागपत। मेरठ के बाद अब पड़ोसी जिले बागपत में भी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर का संकट गहरा गया है। इस किल्लत की सबसे ज्यादा मार बड़ौत स्थित पंचमुखी मंदिर के संस्कृत गुरुकुल पर पड़ रही है। पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण गुरुकुल की रसोई ठंडी पड़ गई है, जिसके चलते यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे बटुकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
चूल्हे पर तैयार हो रहा है सुबह-शाम का भोजन

गैस की अनुपलब्धता के कारण गुरुकुल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मिट्टी का चूल्हा तैयार करना पड़ा है। गुरुकुल में रहने वाले करीब 50 बटुक अब रोजाना सुबह-शाम लकड़ी के चूल्हे पर भोजन पकाने को मजबूर हैं। सिलेंडर न मिलने से आधुनिक रसोई अब धुएं से भर गई है, जिससे बटुकों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ रहा है।

शिफ्ट के अनुसार खाना बना रहे हैं बटुक
गुरुकुल की परंपरा और वर्तमान संकट को देखते हुए सभी 50 बटुकों ने आपस में जिम्मेदारी बांट ली है। यहां बटुक अपनी बारी (शिफ्ट) के अनुसार भोजन तैयार करते हैं। जो समय बटुकों का संस्कृत के श्लोकों और वेदों के अध्ययन में बीतना चाहिए था, वह अब लकड़ी बीनने और चूल्हा फूंकने में खर्च हो रहा है। गुरुकुल प्रशासन का कहना है कि गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें सिलेंडर की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
बड़ौत क्षेत्र में आपूर्ति व्यवस्था चरमराई
पंचमुखी मंदिर स्थित इस गुरुकुल में बटुकों की यह स्थिति बागपत जिले में गैस वितरण प्रणाली की पोल खोल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि न केवल संस्थाएं, बल्कि आम गृहणियां भी सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रही हैं। बड़ौत क्षेत्र में गैस की यह किल्लत पिछले कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
गुरुकुल प्रबंधन ने जिला प्रशासन और संबंधित गैस एजेंसियों से मांग की है कि शिक्षा और सेवा से जुड़ी संस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बटुकों को इस धुएं और मशक्कत से निजात मिल सके।



