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प्राणायाम , योगासन व ध्यान को जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा बनाएं, होगा गुणात्मक सुधार: डॉ रीतू चंद्रमौलि

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर नेचुरोपैथी एवं योग चिकित्सक तथा जयपुर के जगन्नाथ विश्वविद्यालय की नेचुरोपैथी हेड प्रो डॉ रीतू चंद्रमौलि ने कहा कि, योग तथा प्राणायाम हमारी दैनिक जीवन शैली में शामिल हों

बागपत। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर नेचुरोपैथी एवं योग चिकित्सक तथा जयपुर के जगन्नाथ विश्वविद्यालय की नेचुरोपैथी हेड प्रो डॉ रीतू चंद्रमौलि ने कहा कि, योग तथा प्राणायाम हमारी दैनिक जीवन शैली में शामिल हों, तो व्यक्ति आजीवन निरोगी तथा मानसिक रूप से स्वस्थ रहेगा। इतना ही नहीं योगासन और प्राणायाम , हर क्षेत्र में रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं।

बता दें कि, शिक्षाविद डॉ योगेश कौशिक अंडर 70 आयुवर्ग में हैं तथा उनके द्वारा विगत एक माह पूर्व उनसे प्राणायाम के संबंध में वार्ता कर जानकारी हासिल करते हुए हाथ के अंगूठे के मूल में बराबर की दो अंगुलियों का स्पर्श कर अंगूठे से नासिका के छिद्रों को बदलते रहने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके परिणाम अनुकूल तथा सुधार होने के संबंध में डॉ कौशिक ने बताया कि, उनमें गुणात्मक सुधार हुआ है, बांये हाथ की कंपन बहुत कम हुई है।

डॉ रीतू चंद्रमौलि ने कहा कि, योग, प्राणायाम और ध्यान से सामाजिक संरचना में कटुता , घुटन और अलगाव की भावना भी निश्चित रूप से कम होती है तथा सहयोग, सौहार्द और संयम की प्रधानता जीवन में महकने लगती है।

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