प्रयागराज: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक से सरकार को झटका

इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी कानूनी संजीवनी प्रदान की है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एक विवादास्पद मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। आदेश जारी होते ही न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस फैसले का स्वागत किया। कोर्ट ने फिलहाल अपना निर्णय सुरक्षित रखते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
अदालत में बहस के दौरान शंकराचार्य के वकीलों ने इसे एक ‘सरकारी साजिश’ करार दिया। उन्होंने दलील दी कि माघ मेले के दौरान जब शंकराचार्य ने पुलिस प्रशासन की बदसलूकी के खिलाफ 11 दिनों तक धरना दिया था, उसी की रंजिश निकालने के लिए यह फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है। बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता का पिछला रिकॉर्ड आपराधिक है और वह खुद हत्या व गो-हत्या जैसे मामलों में वांछित रहा है। वकीलों ने पूछा कि अगर घटना 18 जनवरी की थी, तो एक महीने बाद मेडिकल और पॉक्सो की अर्जी क्यों दी गई?

सरकारी अधिवक्ता ने तकनीकी आधार पर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट आना नियमों के विरुद्ध है। हालांकि, न्यायमूर्ति ने इस दलील को दरकिनार करते हुए मामले की संवेदनशीलता और असाधारण परिस्थितियों को प्राथमिकता दी। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि कथित पीड़ित बच्चे हरदोई के एक शिक्षण संस्थान में नियमित छात्र हैं और उनकी उपस्थिति के रिकॉर्ड पुलिस की थ्योरी को झुठलाते हैं।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान मेला प्रशासन ने शंकराचार्य की पालकी को रोक दिया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था। अब हाईकोर्ट के इस रुख के बाद पुलिस और प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आदेश के बाद शंकराचार्य के अनुयायियों में खुशी की लहर है और इसे सत्य की जीत बताया जा रहा है।



