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नौसेना को मिला नीलगिरी श्रेणी का चौथा स्वदेशी एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’

नई दिल्ली। मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित नीलगिरि श्रेणी का चौथा युद्धपोत तारागिरी, मुंबई में शनिवार को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। प्रोजेक्ट 17 ए के तहत बनाया गया यह युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता पाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह फ्रिगेट कई तरह से इस्तेमाल होने वाले मल्टी-मिशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र में मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह युद्धपोत प्रोजेक्ट-17 अल्फा फ्रिगेट्स (पी-17ए) का हिस्सा है, जो गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स का एक वर्ग है, जिसका निर्माण वर्तमान में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (एमडीएल) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) में नौसेना के लिए किया जा रहा है। एमडीएल में प्रोजेक्ट 17 ए के तहत सात स्टेल्थ फ्रिगेट बनाये जा रहे हैं, जिसमें से दूसरा जहाज ‘उदयगिरि’ इसी साल 01 जुलाई को सौंपा गया था। अग्रिम पंक्ति के मल्टी मिशन स्टील्थ फ्रिगेट ‘उदयगिरि’ को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 अगस्त को विशाखापत्तनम के नौसेना बेस पर नौसेना के समुद्री बेड़े में शामिल किया। ‘तारागिरि’ (यार्ड 12653) नीलगिरि श्रेणी का चौथा युद्धपोत है, जिसे आज नौसेना को सौंपा गया है।

नौसेना के मुताबिक तारागिरि पहले के आईएनएस तारागिरि का नया रूप है, जो एक लिएंडर-क्लास फ्रिगेट था। यह जहाज 16 मई 1980 से 27 जून 2013 तक भारत के समुद्री बेड़े का हिस्सा था, जिसने देश को 33 साल की शानदार सेवा दी। यह स्टेट-ऑफ-द-आर्ट फ्रिगेट नेवल डिजाइन, स्टेल्थ, फायरपावर, ऑटोमेशन और सर्वाइवेबिलिटी में एक बड़ी छलांग दिखाता और वॉरशिप बनाने में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। ये बहु-मिशन फ्रिगेट भारत के समुद्री हितों के क्षेत्र में पारंपरिक और अपारंपरिक दोनों तरह के खतरों से निपटते हुए महासागरीय वातावरण में संचालन करने में सक्षम हैं।

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के अनुसार प्रोजेक्ट-17 ए जहाजों में स्टेल्थ की विशेषताएं बढ़ाई गई हैं और इनमें अत्याधुनिक हथियार और सेंसर लगे हैं, जो पी-17 श्रेणी से काफी बेहतर हैं। इन जहाजों का पतवार प्रोजेक्ट 17 की तुलना में 4.54 फीसदी अधिक भू-सममितीय है। इन जहाजों में प्रोजेक्ट 17 वर्ग की तुलना में उन्नत चिकना और विशेषताओं के साथ एक उन्नत हथियार और सेंसर सूट लगाया गया है। जहाजों को संयुक्त डीजल या गैस मुख्य प्रणोदन संयंत्रों के साथ कॉन्फ़िगर किया गया है, जिसमें एक डीजल इंजन और गैस टरबाइन शामिल है। हथियार सूट में सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, 76 मिमी गन और 30 मिमी और 12.7 मिमी रैपिड-फायर क्लोज-इन हथियार प्रणालियों को लगाया गया है।

तारागिरि पिछले 11 महीनों में नौसेना मिलने वाला चौथा युद्धपोत है। पहले दो युद्धपोत बनाने से मिले अनुभव से तारागिरि के बनने का समय 81 महीने कम हो गया है, जबकि फर्स्ट क्लास (नीलगिरि) को बनने में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट 17ए के बाकी तीन जहाजों की (एक एमडीएल में और दो जीआरएसई में) अगस्त, 2026 तक धीरे-धीरे आपूर्ति करने की योजना है। तारागिरि की आपूर्ति देश के डिजाइन, जहाज बनाने और इंजीनियरिंग की काबिलियत को दिखाती है। 75 फीसदी स्वदेशीकरण वाले इस प्रोजेक्ट में 200 से ज्यादा एमएसएमई शामिल हुए हैं और इससे लगभग 4,000 लोगों को सीधे और 10 हजार से लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला।

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