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निठारी हत्याकांड का आरोपी सुरेंद्र कोली बरी; 16 साल बाद हुआ जेल से रिहा

निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जिला जेल से रिहा कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि 2006 में सिलसिलेवार तरीके से हुई हत्याओं से जुड़े आखिरी लंबित मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के एक दिन बाद कोली को रिहा कर दिया गया।

कोट-पैंट में मुस्कुराते हुए लुक्सर जेल से निकला कोली 
जेल अधीक्षक बृजेश कुमार ने बुधवार शाम करीब 7.20 बजे कोली के जेल से रिहा होने की पुष्टि की। कुमार ने बताया, “उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सुरेंद्र कोली को रिहा कर दिया गया।” नीली कमीज, काली पैंट और गहरे नीले रंग की जैकेट पहने कोली अपने वकीलों के साथ जेल से बाहर निकला। कोली के परिवार के सदस्य जेल के गेट पर मौजूद नहीं थे और उसने बाहर जमा मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। रिहाई के बाद उसे कहां ले जाया गया, यह तुरंत पता नहीं चल पाया।

क्या है निठारी कांड? 
निठारी कांड 2006 में उस समय सामने आया, जब नोएडा के सेक्टर 31 में रहने वाले व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर के बंगले (डी-5) के पास के पीछे के हिस्से और नालियों से कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिलीं थी। इस मामले में सह-आरोपी पंधेर भी कई वर्ष तक जेल में रहा, लेकिन मामले में बरी होने के बाद 20 अक्टूबर, 2023 को उसे रिहा कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने मंगलवार को 15 वर्षीय लड़की के साथ कथित दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या से संबंधित अंतिम लंबित मामले में कोली को बरी कर दिया।

अदालत ने क्या कहा? 
अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून अनुमान या पूर्वाभास के आधार पर दोषसिद्धि की अनुमति नहीं देता और अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। पीठ ने अपराधों की ‘जघन्य’ प्रकृति और पीड़ित परिवारों की ‘अथाह पीड़ा’ को स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध सिद्ध करने में विफल रहा। वर्ष 2006 में गिरफ्तारी के समय कोली की उम्र 2006 में 30 वर्ष थी और पिछले कुछ वर्षों में उसे विभिन्न मामलों में कई बार मृत्युदंड दिया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जनवरी 2015 में उसकी दया याचिका पर निर्णय में देरी का हवाला देते हुए उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2023 में निठारी के अन्य मामलों में कोली और पंधेर दोनों को बरी कर दिया, और अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाये गये मृत्युदंड के फैसले को पलट दिया। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने इस वर्ष 30 जुलाई को बरी किए गए दोनों लोगों के खिलाफ सभी अपीलें खारिज कर दीं।

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