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नई दिल्ली में इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर थाना पुलिस ने एक संगठित इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेरोजगार युवाओं और नौकरी तलाश रहे लोगों को विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगता था। इस ठगी के जरिए अब तक 1.80 लाख की राशि वसूली गई, जिसे विभिन्न म्यूल बैंक खाते के माध्यम से घुमाया गया। गिरफ्तार आरोपितों में गुजरात, पश्चिम बंगाल और हरियाणा के रहने वाले तीन मुख्य सदस्य शामिल हैं। इनमें एक असिस्टेंट बैंक मैनेजर भी है जो गिरोह के लिए फर्जी बैंक खाते खोलता था।

कैसे हुआ खुलासा

दक्षिण-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने सोमवार को बताया कि कोविड-19 में नौकरी खो चुके शिकायतकर्ता ए.के. सहाय विदेश में रोजगार तलाश रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप से संदेश मिला, जिसमें “एडुटेक कंसल्टेंट” और समूह व्यवस्थापक आदेश श्रीवास्तव के नाम से विदेशी नौकरी का ऑफर दिया गया। शिकायतकर्ता को न्यूज़ीलैंड में कुक/शेफ की नौकरी का प्रस्ताव 2.80 लाख में दिया गया। भरोसा जीतने के लिए आरोपितों ने फर्जी वीजा, कंपनी के रजिस्ट्रेशन दस्तावेज और यात्रा टिकट तक भेज दिए।

इन दस्तावेजों पर विश्वास कर पीड़ित ने 1.80 लाख आरोपित द्वारा बताए गए खातों में जमा कर दिए। जिसके बाद गिरोह के सदस्य गायब हो गए। जब शिकायतकर्ता को शंका हुई और उसने सभी दस्तावेजों की जांच कराई तो वे फर्जी पाए गए। इस पर साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार पुलिस टीम ने आरोपितों तक पहुंचने के लिए गहन तकनीकी विश्लेषण किया। पहले व्हाट्सऐप नंबरों की लोकेशन, चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच की गई। इसके साथ ही ठगी की राशि जिस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी, उसकी लेयरिंग की जांच की गई। छानबीन के दौरान पता चला रकम पहले एक म्यूल खाते में जमा हुई, फिर दूसरे खाते में भेजी गई ताकि असली स्रोत को छुपाया जा सके। बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन की जांच से गिरोह का जाल गुजरात, गुरुग्राम और कोलकाता तक फैला पाया गया।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार लगातार निगरानी व ट्रैप लगाने के बाद पुलिस ने ऋषिकेश से पहले आरोपित केतन दीपक कुमार को गिरफ्तार किया। उसके पास से ठगी में इस्तेमाल हुआ मुख्य कॉलिंग डिवाइस बरामद हुआ। उसकी निशानदेही पर कोलकाता से दूसरे आरोपित संजीव मंडल को दबोचा। इसके बाद तीसरे आरोपित और बैंककर्मी रवि कुमार मिश्रा को गिरफ्तार किया गया।

गिरोह का तरीका

तीनों आरोपित अच्छी तरह से संगठित नेटवर्क के तौर पर काम करते थे। इनमें संजीव मंडल फर्जी नाम “एडुटेक किरण केवी” के रूप में व्हाट्सऐप पर बातचीत कर पीड़ितों को विश्वास में लेता था। जबकि केतन दीपक कुमार विभिन्न लोगों के नाम से बैंक खाते प्राप्त करता और उन पर गिरोह का नियंत्रण स्थापित कराता। इसके अलावा बैंक अधिकारी रवि कुमार मिश्रा बिना संदेह पैदा किए बैंक खाते खोलकर सीधे गिरोह को सौंप देता, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था।

जांच में पता चला है कि ये लोग नौकरी का लालच देकर पहले दस्तावेजों के नाम पर पैसे जमा कराते, फिर उनका जवाब देना बंद कर देते। पुलिस ने आराेपिताें के कब्जे से 06 मोबाइल फोन (जिसमें कॉलिंग डिवाइस शामिल), 02 लैपटॉप और 50,000/- नकद (ठगी की राशि का हिस्सा) बरामद किया है।

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