राजनीति

देश में कुछ लोग ऐसे हैं जो चाहते हैं जो बांग्लादेश में हुआ, वहीं भारत में हो: उपराष्ट्रपति धनखड़

उपराष्ट्रपति ने किसी का नाम लिए बगैर सवाल उठाया कि अपने जीवन में सांसद, मंत्री जैसे जिम्मेदार पदों पर रहने और विदेश सेवा का लंबा अनुभव रखने के बावजूद लोग ऐसा मिथ्या प्रचार कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि सावधान रहने का वक्त है।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को चिंता जताई कि देश में कुछ लोग साजिश के तहत एक नैरेटिव चला रहे हैं कि हमारे पड़ौसी देश (बांग्लादेश) जैसा घटनाक्रम भारत में भी होगा। उपराष्ट्रपति ने किसी का नाम लिए बगैर सवाल उठाया कि अपने जीवन में सांसद, मंत्री जैसे जिम्मेदार पदों पर रहने और विदेश सेवा का लंबा अनुभव रखने के बावजूद लोग ऐसा मिथ्या प्रचार कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि सावधान रहने का वक्त है। ऐसी राष्ट्र विरोधी ताकतें अपने कार्यों को छिपाने या वैध बनाने के लिए हमारे मौलिक संवैधानिक संस्थानों के मंचों का उपयोग कर रही हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के प्लेटिनम जुबली कार्यक्रमों की कड़ी में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए धनखड़ ने चेताया कि ये ताकतें देश तोड़ने को तत्पर हैं और राष्ट्र के विकास व लोकतंत्र को पटरी से उतारने के लिए मनगढ़ंत नैरेटिव चलाती हैं। राष्ट्रहित सर्वोपरि है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता।

धनखड़ ने कहा कि एक सशक्त स्वतंत्र न्यायपालिका को पोषित करने के बावजूद आपातकाल का दुखद अपवाद हम कभी नहीं भूल सकते। हम न्यायपालिका के एक अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा हैं, लेकिन उस समय नागरिकों के मूल अधिकारों का मजबूत किला, सुप्रीम कोर्ट, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तानाशाही शासन के आगे झुक गया था। ऐसे में किसी भी देशवासी को उस काले दौर को नहीं भूलना चाहिए।तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जब तक आपातकाल रहेगा, कोई भी अपने अधिकारों को लागू करवाने के लिए किसी भी अदालत में नहीं जा सकता।

उप राष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे इन घटनाओं को पूरी तरह से जानें और स्वतंत्रता की कीमत और सतर्कता को समझें। अगर सुप्रीम कोर्ट ने उस समय झुकने से इनकार कर दिया होता तो आपातकाल नहीं होता। हमारा राष्ट्र बहुत पहले ही अधिक विकास कर चुका होता और हमें दशकों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। इस कारण सरकार ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं। यदि ये संस्थाएं कमजोर हो जाती हैं, तो हमारे लोकतंत्र को खतरा होगा और हमारी विकास की दिशा पटरी से उतर जाएगी।

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