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जलवायु परिवर्तन को लेकर मानव रचना ने किया राष्ट्रीय पर्यावरण युवा संसद का आयोजन

गुडग़ांव, 17 अप्रैल (अशोक): जलवायु परिवर्तन को लेकर विभिन्न संस्थाओं
द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा है। जलवायु परिवर्तन के
प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए छात्रों का बड़ा योगदान हो सकता है।
इसको ध्यान में रखते हुए मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट द्वारा युवा
संसद का आयोजन किया गया, जिसमें देश के 156 से अधिक विश्वविद्यालयों के 3
हजार से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन
करने वाले छात्रों व विश्वविद्यालयों को भी पुरुस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के आयोजक डा. प्रशांत भल्ला ने बताया कि कोरोना काल में गत
वर्ष राष्ट्रीय पर्यावरण युवा मंच के साथ यह युवा संसद यात्रा ऑनलाईन
शुरु की गई थी जो अब संसद भवन तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि इस
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
भूपेंद्र यादव सहित पर्यावरण विशेषज्ञ व सांसद तथा गणमान्य व्यक्ति भी
बड़ी संख्या में शामिल हुए। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जलवायु परिवर्तन ने
पृथ्वी के 5 गुणी आदि तत्वों को प्रभावित किया है। उन्होंने ग्रीन हाउस
प्रभावों को कम करने और परिस्थिति के तंत्र को बनाए रखने के लिए योजना
तैयार करने पर बल दिया। भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नए
ऊर्जा संसाधनों ने कार्बन उत्सर्जन में बहुत योगदान दिया है। उन्होंने
कहा कि आगामी 30 जून से देश में 120 मिलीमीटर प्लास्टिक को पूरी तरह से
प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। क्षेत्रीय भाषाओं में भी राष्ट्रीय पर्यावरण
युवा संसद आयोजित करने की इच्छा भी उन्होंने व्यक्त की। युवाओं को डा.
एनसी वधवा, डा. संजय श्रीवास्तव, डा. आईके भट्ट, डा. जीके चावला,
प्रसन्नजीत सिंह, गोपाल आर्य, राकेश जैन, गूगल बॉय कौटिल्य पंडित ने भी
संबोधित करते हुए पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि
छात्र इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। छात्रों को पुरुस्कृत
भी किया गया।

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