छपरौली। कस्बे के सरकारी अस्पताल में एक्सरे के मरीज जांच के लिए भटकते रहे। लोगों को सुलभ व निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बने सरकारी अस्पताल बदहाली के कगार पर हैं। यहां आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों की भांति ही महंगी जांच व दवाओं का बोझ उठाना पड़ता है। हर रोज दर्जनों मरीजों को बाहर एक्सरे करवाना पड़ रहा है। इसमें सात सौ रुपये से एक हजार तक देने पड़ते हैं। समुदाय स्वास्थ्य केंद्र पर इंतजार कर रहे सुरेंद्र, जैनम, जयपाल और मौसम ने बताया कि सरकारी अस्पताल में बिजली ना होने के कारण एक्सरे नहीं हो रहा है। अस्पताल में जनरेटर सुविधा उपलब्ध है इसके बावजूद कर्मचारी कह रहे हैं कि बिजली आने पर एक्सरे होगा। परेशान मरीजों का कहना है कि सीएचसी पर जनरेटर की भी सुविधा है लेकिन सीएससी पर तैनात कर्मचारी एवं चिकित्सक जनरेटर न चलाने के बहाने बनाते हैं उनका तर्क है कि जनरेटर छोटा है और एक्सरे मशीन बड़ी है इससे ये नहीं चलेगी। जनरेटर होने के बावजूद मरीजों का एक्सरे बिजली पर निर्भर है अगर बिजली खराब हो जाती है या नहीं आती तो लोगों को बाजार में निजी एक्सरे लैब पर एक्स-रे कराना पड़ता है जिससे उन्हें आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ता है। सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर यशवीर सिंह ने बताया जनरेटर इमरजेंसी के लिए है अगर बिजली आपूर्ति नहीं होती तो जनरेटर चलाकर कार्य किया जाता है। आवश्यकता होने पर जनरेटर चलाकर एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।


