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चैत्रीय नवरात्रः घोडे पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
2 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं चैत्रीय नवरात्र, मंदिरों में तैयारियां शुरू
शामली। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित चैत्रीय नवरात्र 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रहे हैं। नवरात्र को लेकर जहां मंदिरों में तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं वहीं बाजारों में भी खरीददारी प्रारंभ हो गयी है। श्रद्धालु मां के लिए नारियल, चुनरी, छत्र आदि की खरीदारी करने में जुट गए हैं। नवरात्र 2 अप्रैल से प्रारंभ होकर 11 अप्रैल तक चलेंगे। 9 अप्रैल को अष्टमी जबकि 10 अप्रैल को नवमी का त्यौहार मनाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित चैत्रीय नवरात्र 2 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। चैत्रीय नवरात्र अप्रैल के माह में मनाया जाता है और इस साल यह 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है जो 11 अप्रैल तक चलेगा। यह हिन्दुओं के सबसे शुभ त्यौहारों में से एक है। यह हिन्दू महीने के पहले दिन से शुरू होता है जिससे त्यौहार का नाम मिलता है। सबसे पहले कलश स्थापना होती है और नवमी के साथ नवरात्रों की समाप्ति होती है। इस वर्ष 9 अप्रैल को अष्टमी व 10 अप्रैल को नवमी का पर्व मनाया जाएगा। पुजारियों के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल की प्रतिपदा तिथि एक अप्रैल को सुबह 11.53 बजे शुरू होगी और 2 अप्रैल शनिवार को सुबह 11.58 बजे पर समाप्त होगी, नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, इसके बाद 9 दिनों तक कलश का नियमित पूजन होता है, इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल को सुबह 6.10 से 8.29 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर साल नवरात्रि पर माता रानी किसी न किसी वाहन पर सवार होकर आती है, वहीं लौटते समय मातारानी का वाहन अलग होता है। चैत्र नवरात्रि में मां घोडे पर सवार होकर आएंगी, अगर नवरात्रि की शुरूआत रविवार या सोमवार से होती तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है, पहले दिन माता शैलपुत्री का पूजन किया जाता है, दूसरा दिन ब्रहमचारिणी, तीसरा चंद्रघंटा, चौथा कूष्मांडा, पांचवां स्कन्दमाता, छठां, कात्यायनी, सातवां कालरात्रि, आठवां महागौरी व नौंवा स्वरूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। वहीं नवरात्रों को लेकर जहां मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गयी हैं वहीं श्रद्धालु भी नवरात्र से संबंधित सामानों की खरीददारी में जुट गए हैं। गुरुवार को बाजारों में श्रद्धालुओं ने नारियल, चुनरी, छत्र आदि की खरीददारी की।



