चिराग़ों की ख़ुशामद मत करो मैं दिल जलाऊंगा- जोहर कानपुरी
शुक्रवार रात बिनौली रोड स्थित एमके फार्म हाउस में ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें मुल्क के नामचीन शायरों और कविगणों ने अपने कलाम के जरिये कौमी यकजहती का पैगाम दिया।

सरधना। शुक्रवार रात बिनौली रोड स्थित एमके फार्म हाउस में ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें मुल्क के नामचीन शायरों और कविगणों ने अपने कलाम के जरिये कौमी यकजहती का पैगाम दिया।

पूर्व विधायक मरहूम बाबू अब्दुल वहीद कुरैशी और पूर्व चेयरमैन स्व. बाबू प्यारे लाल की याद में आयोजित इस गंगा जमनी महफ़िल के संयोजक एड. बांके पंवार रहे। सदारत समाज सेवी समर कुरैशी और अंबुज प्रकाश ने संयुक्त रूप से की। समाज सेवी शरद त्यागी मुख्य अतिथि रहे। कुंवर बासित अली प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा भाजपा उत्तर प्रदेश और एड. बांके पंवार ने फीता काट कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रारम्भिक संचालन संजीव गुप्ता प्राचार्य ने किया और मुशायरा व कवि सम्मेलन का संचालन डॉ. फुरक़ान अहमद सरधनवी ने किया।

प्रोग्राम की शुरुआत शकील ताबिश की नात पाक और तुषा शर्मा की सरस्वती वंदना से हुई। बारिश और बूंदाबांदी के बावजूद श्रोताओं ने सुबह चार बजे तक शायरों और कवियों के कलाम का लुत्फ लिया।
जौहर कानपुरी ने अपने कलाम में कहा-
तुम्हारा घर हमेशा रोशनी से जगमगाऊंगा।
चिराग़ों की ख़ुशामद मत करो मैं दिल जलाऊंगा।।
मोहतरमा शबीना अदीब ने ख़ूबसूरती को लेकर गुरुर करने से दूर रहने का इन लफ़्ज़ों में पैगाम दिया-
ये जो मुझ पर नूर है ये नूर है ईमान का
मैं कहां इतनी हसीं हूं, तुम समझते क्यों नहीं।।
एक हो सकते नहीं हम सामने रहते हुए
तुम फलक हो मैं जमीं हूं तुम समझते क्यों नहीं।।
विजेन्द्र सिंह परवाज़ ने आने कलाम में कहा-
जब तक न ढक लिया उसे रस्ते के मोड़ ने।
मेरी निगाह उस का बदन चूमती रही।।
मालेगांव से तशरीफ़ लाए मशहूर शायर अल्ताफ़ ज़िया का ये अंदाज बहुत पसंद किया गया-
कोई दीवार हो, दीवार नहीं बन सकती,
जब हवाओं का गुज़र जाने को जी चाहता है।।
तुषा शर्मा ने कहा-
तू मेरी धड़कन में यूं समाया कि सांस तेरा ही नाम लेकर,
जो चांद तारों को देखती हूं तुम्हारी सूरत सी लग रही है।
दिल्ली से आए हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने अपने कलाम से सबको खिलखिलाने पर मजबूर कर दिया। बानगी देखें-
हंसना-हंसाना आदत है मेरी।
अपना बनाना आदत है मेरी।
लोग मुंह फेर के चलते है,
आवाज देके बुलाना आदत है मेरी।।
अब्दुल सलाम फ़रीदी ने कहा-
चांद जाकर बादलों में खो गया।
मेरे आंगन में अंधेरा हो गया।।
याक़ूब मोहसिन के कलाम को खूब सराहा गया-
उनको तन्हाई में रोते हुए पाया हमने,
जिन को सुनते थे हंसाने का हुनर आता है।
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद ने अपने कलाम में कहा
पड़ी है भारी मुहब्बत हमेशा नफरत पर,
ज़रा सा इत्र फ़िज़ा को संवार देता है।।
……
इसके अलावा खतौली से आए रियाज़ सागर, ने कौमी एक जहती पर अपना कलाम पेश करते हुए कहा
हमने हर मुश्किल मिलकर ही आसान की, आओ फिर लिखे तकदीर हिंदुस्तान की ।।
डॉ. फुरक़ान अहमद सरधनवी, बलबीर सिंह खिचड़ी, दानिश ग़ज़ल, वीरेंद्र अबोध, संजय जैन सत्यम आदि ने भी अपना कलाम पेश किया।
कार्यक्रम में डॉक्टर सुनील त्यागी, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश सोम, वीरेंद्र चौधरी, दीपक शर्मा, इरफान जावेद सिद्दीक़ी, तहसीन कुरैशी, ज़ीशान क़ुरैशी, आलोक जैन, वीरेन्द्र चौधरी, राशिद कुरैशी, नोमान कुरैशी, रईस उद्दीन अंसारी, सुनील गोयल, मशकूर खान,अशरफ खान, मतलब खान, आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे। संयोजक बांके पंवार ने सभी अतिथियों, कवियों, शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। प्रोग्राम में पीयूष त्यागी, हकीम रईस, शाकिर अंसारी, रेहान मालिक अर्जुन, दीपक आदि का सहयोग रहा। इस दौरान कार्यक्रम में आए गणमान्य लोगों अतिथियों, शायरों, व कवियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

