चातुर्मास के अंतर्गत दंडी स्वामी सत्यदेव आश्रम जी ने सुनाई बाणासुर कथा
महाराजा अग्रसेन भवन बड़ौत में चातुर्मास कर रहे दंडी स्वामी जी ने शिव महापुराण कथा मैं बाणासुर कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया बाणासुर दान वीर दैत्य राज बली के 100 पुत्रों में सबसे बड़ा तथा प्रतापी था।

महाराजा अग्रसेन भवन बड़ौत में चातुर्मास कर रहे दंडी स्वामी जी ने शिव महापुराण कथा मैं बाणासुर कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया बाणासुर दान वीर दैत्य राज बली के 100 पुत्रों में सबसे बड़ा तथा प्रतापी था। यह भगवान शिव का अनन्य भक्त था। इसने भगवान शिव को प्रसन्न कर सहस्त्र भुजओ तथा अपार शक्ति का वरदान प्राप्त किया। एक बार भगवान शिव तांडव नृत्य कर रहे थे इसने अपनी सहस्त्र भुजाओ के साथ मृदंग बजा कर भगवान शिव को प्रसन्न किया तथा वर लिया कि आप मेरे राज्य के रक्षक होंगे जिसके कारण यह अजय हो गया। एक बार बाणासुर के मंत्री चित्रलेखा की पुत्री ने अपनी सहेली के लिए योग माया से भगवान कृष्ण के पोत्र अनिरुद्ध का अपहरण कर लिया। अनिरुद्ध की मुक्ति के लिए भगवान कृष्ण ने बाणासुर के राज पर आक्रमण किया भगवान कृष्ण 64 शिल्प में पारंगत थे। जब बाणासुर युद्ध में थकने लगा भगवान शिव को याद किया। भगवान शिव युद्ध के लिए आ गए यह देख भगवान कृष्ण ने भगवान शिव को नमन कर निद्रा अस्रत छोड़ा जिस से भगवान शिव निंद्रा में चले गए। तब कृष्ण जी ने बाणासुर की सहस्त्र भुजाओं को सुदर्शन चक्र से काटा दंडी स्वामी जी ने कहा भगवान से प्राप्त शक्ति को सही दिशा में लगाना चाहिए। अन्यथा भगवान दी हुई शक्ति को वापस लेने की व्यवस्था तैयार रखते हैं डॉ दीपक गौतम ने बताया आज का पुराण पूजन आरती मनोज गर्ग चावल वालों के परिवार द्वारा की गई कथा सुनने वालों में धर्म प्रकाश वर्मा योगेश लखेरा दीपांशु अशोक शर्मा देवदत्त कृष्णपाल आदि श्रद्धालु रहे।


