uttar pradesh
Trending

गिद्ध संरक्षण के लिये यूपी के 14 जिले चिन्हित

पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्धों की घटती तादाद से चिन्हित उत्तर प्रदेश सरकार ने पक्षी के संरक्षण के लिये 14 जिले चिन्हित किये हैं।

बरेली। पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्धों की घटती तादाद से चिन्हित उत्तर प्रदेश सरकार ने पक्षी के संरक्षण के लिये 14 जिले चिन्हित किये हैं।
वन विभाग के सूत्रों ने रविवार को बताया कि गिद्धों को संरक्षण देने के लिए नये सिरे से योजना तैयार की गई है और इसके लिए प्रदेश के 14 जिले चिह्नित किए गए जहां गिद्धों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाएगा। रुहेलखंड जोन के बरेली, पीलीभीत व बिजनौर जिलों को इसमें चयनित किया गया है। वन विभाग जमीन तय कर चुका है। अब गाइड लाइन एवं बजट आने का इंतजार हो रहा है।
बरेली के मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा ने बताया कि गिद्ध संरक्षण के लिए प्रदेश के 14 जिलों का चयन किया गया है। इसमें रुहेलखंड जोन के तीन जिले बरेली, पीलीभीत व बिजनौर शामिल हैं। गिद्ध संरक्षण केंद्र के लिए शासन की गाइडलाइन की प्रतीक्षा की जा रही है।
प्रदेश सरकार ने गिद्धों के संरक्षण की योजना बनाई इसके लिए तराई क्षेत्र में संरक्षण केंद्र बनाए जाने हैं। यह स्थान खुले होंगे मगर सुरक्षा एवं अनुकूल स्थान के लिए नियमित निगरानी की जाएगी वन विभाग के साथ कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और बॉम्बे नेचर हिस्ट्री सोसायटी (बी एन एच एस) के वैज्ञानिक इसकी विस्तृत रूपरेखा बना रहे हैं।
वर्मा ने बताया कि गिद्धों को अनुकूल माहौल देने के लिए खेती में रसायनों का उपयोग कम करके प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा। गिद्ध एक बार में 130 किलोमीटर तक दी की उड़ान भर सकते हैं। उनके लिए तराई में सुरक्षित क्षेत्र बनाकर वंशवृद्धि का प्रयास भी होगा। चयनित जिलों में संरक्षण केंद्र बनाए जाने हैं। उसके आसपास मुख्य तौर पर क्षेत्र में आर्गेनिक प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा।
खेती में रसायनों खादों और कीटनाशक प्रयोग के कारण ही गिद्धों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। इनकी संख्या तेजी से कम होती गयी। अब इनकी निगरानी की जाएगी। विभाग व बांबे नेचर हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के वैज्ञानिक संरक्षण केंद्र बनाने का विस्तृत रूपरेखा बना रहे हैं। तभी मुख्य कार्य क्षेत्र में शुरू हो सकेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button