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गर्मी के मौसम में बढ़ जाती है मां की जिम्मेदारी, बच्चों का रखें ख्याल

मुजफ्फरनगर। नवजात शिशुओं की देखभाल शुरुआत के 28 दिन बहुत जरूरी है। इस दौरान शिशुओं का विशेष ख्याल रखना चाहिए। वरना कई गंभीर बीमारियों की जद में आ सकते हैं। वहीं प्रसूताओं को शिशुओं को बाहर का दूध नहीं देना चाहिए। स्तनपान नवजात के लिए सबसे जरूरी है। वहीं गर्मी के मौसम में नवजात की देखभाल को लेकर मां की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यह बातें जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. आभा आत्रेय ने कहीं।
डॉ. आभा आत्रेय ने बताया – नवजात के लिए गर्मी का मौसम बेहद असहनशील होता है, क्योंकि पहली बार वह ऐसे माहौल से रू-ब-रू होते हैं। किसी के लिए भी गर्मी को झेलना आसान नहीं होता है और बच्चों के लिए तो गर्मियों का मौसम कुछ ज्यादा ही मुश्किल भरा होता है। शिशु की पहली गर्मी को लेकर मां की जिम्मेदारी शिशु के प्रति बढ़ जाती है। गर्मी में बच्चे को लू लगने, घमौरियों और त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं। तेज आवाज में और लगातार रोना, खूब पसीना निकलना, बाल गीले होना, लाल गाल और तेज सांस लेने जैसे लक्षण इस बात के संकेत हैं कि बच्चा अत्यधिक गर्मी से परेशान हो रहा है।
उन्होंने कहा – गर्मी के मौसम में नवजात को धूप की सीधी किरणों से दूर रखें। छह माह से कम उम्र के बच्चों की त्वचा में सूर्य की किरणों से सुरक्षा के लिए बहुत कम मेलानिन होता है। मेलानिन ऐसा पिगमेंट होता है, जो त्वचा, आंखों और बालों को रंगत प्रदान करता है। लिहाजा मेलानिन के अभाव में सूर्य की किरणें त्वचा की कोशिकाओं को स्थायी रूप से भी क्षतिग्रस्त कर सकती हैं।
छह माह तक बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी
स्तनपान के फायदे बच्चों के लिए अनगिनत होते हैं। स्तनपान करने से बच्चे की सेहत अच्छी रहती है और मां के शरीर को भी एंटीबॉडी मिलती है। अगर बच्चे को बीमारियों के खतरे से बचाना है तो उसे स्तनपान जरूर करवाएं। छह माह तक केवल स्तनपान कराएं यहां तक कि उसे पानी भी नहीं देना है। छह माह के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ ऊपरी आहार दें।
इन बातों का भी रखें ख्याल
रोजाना बॉडी स्पंज करें आमतौर पर नवजात शिशुओं को गुनगुने पानी से नहलाया जाता है, क्योंकि उनका शरीर ठंडा पानी सहने के योग्य नहीं होता है।
शिशु को हाइड्रेटेड रखें
हाइड्रेटेड रखने का मतलब यह नहीं कि उसे पानी पिला दें। छह माह तक के बच्चे को मां के दूध के सिवाय कुछ भी नहीं देना है यहां तक कि पानी भी नहीं।
ध्यान रखें दोपहर में घर से बाहर न निकलें
सूती के कपड़े पहनाएं
डायपर कम पहनाएं

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