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किसान आन्दोलन के भटकाव के कारण मजबूरी में लिया गया अलग संगठन बनाने का निर्णय, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) – श्री राजेश सिंह चौहान

भाकियू में लोकतंत्र नहीं बचा है - हरिनाम सिंह वर्मा

लखनऊ। गन्ना संस्थान, डालीबाग लखनऊ में चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत जी की पुण्यतिथि पर किसान आन्दोलन की दशा व दिशा पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें उत्तर प्रदेश के कोने कोने से किसान शामिल हुए। गोष्ठी में चिन्तन करते हुए कहा कि देश में एक नये किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की आवश्यकता क्यों , भाकियू में राष्ट्रीय सचिव के पद पर लम्बे समय से कार्यरत अनिल तालान ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि,आज हम यहाँ किसान आन्दोलन की दशा व दिशा पर चिन्तन करने व नये किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की आवश्यकता क्यों पड़ी इस पर विचार करने के लिए इकट्ठा हुए है। यहाँ पर उपस्थित अधिकतर लोगों ने देश के महान किसान नेता स्व0 चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के साथ कार्य किया है। आज उनकी पूण्यतिथि भी है इस अवसर पर हम उनको नमन करते है। किसान चिन्तक हरिनाम सिंह वर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान नेता स्व0 चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने भारतीय किसान यूनियन का गठन इसलिए किया था कि यह संगठन किसानों की वास्तविक समस्याओं को सरकार के सामने उठाएगा संगठन में लोकतंत्र रहेगा और हमेशा अराजनैतिक स्वरूप में रहेगा लेकिन दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज उनके इस बनाये गये संगठन में न तो किसानों की वास्तविक समस्याओं को सरकार के सामने उठाया जा रहा है न संगठन में लोकतंत्र है और न ही यह संगठन अराजनैतिक रहा है।
किसान नेता श्री राजेश सिंह चौहान जी ने भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में किसानों के साथ एक जैसी समस्या है, इसलिए देश में एक ऐसे किसान संगठन की आवश्यकता है जो देश व विश्वव्यापी किसान समस्याओं को लेकर चिंतन मंथन और आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर सके और साथ ही किसानों की समस्याओं को हल करने में अपनी सकारात्मक भूमिका भी सुनिश्चित कर सके।
देश में कृषि उत्पाद बाजार या फिर कारखानों के माध्यम से उपभोक्ता तक पहुंचता है, तो उसका मूल्य खेत उत्पाद मूल्य की तुलना में तीन गुणा तक बढ़ जाता है। कृषि और कृषक समस्याओं को लेकर आए दिन वहां भी आन्दोलन होते रहते हैं। इसके समाधान के लिए किसानों का एक अच्छा संगठन होना चाहिए, जो तथ्यों के साथ सरकार से संवाद कर सके और साथ ही एक वैश्विक मंच होना चाहिए जो बिना किसी पूर्वाग्रह के दुनिया के किसानों के कल्याण की चिंता करे सके।
गठवाला मलिक खाप के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह मलिक जी ने कहा कि सम्मानित किसानों/नागरिकों ये देश हर भारतीय का है पर इसकी बुनियान किसान के अथक परिश्रम व त्याग पर टिकी है। विश्व में जब मन्दी का दौर आता है तो यही किसान अपने खून पसीने से अर्थव्यवस्था को संभालता है। कोरोना काल में देश का एक नागरिक भी भूखा नहीं सोया न ही देश की अर्थव्यवस्था डगमगाई इसका श्रेय भी किसान को जाता है। आज भी सूचना क्रांति के दौर में छोटी-छोटी किसान समस्याओं के लिए किसान रोकना, मै किसान आन्दोलन की बडी उपलब्धि नहीं मानता। आन्दोलन का कार्य किसान हित में सरकार पर दबाव बनाकर नीति का निर्माण कराना है। किसान पक्षी, कीडे, ओले, तूफान, अतिवृष्टि आदि से नुक्सान होने के कारण भी सदियों से चुप-चाप नुक्सान सहकर भी अपने खेत में जुटा रहता है। राष्ट्र निर्माण में उसकी अहम भूमिका है। हम किसान नेता नहीं बल्कि किसान के बेटे एवं किसान होने के नाते किसान आन्दोलन के नाम पर उपद्रव का समर्थन नहीं करते। इस विषय पर मेरी राय हमेशा से स्पष्ट रही है। केन्द्र व राज्य सरकारों के सहयोग के बिना किसानों का जीवन कहीं अधिक संकटों से भर जायेगा। किसान आन्दोलन का दबाव हमेशा रहना चाहिए जिससे किसान सरकार की योजनाओं के केन्द्र में रहे। किसान चिन्तक धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि कृषि में बदलाव समय की मांग हैए इसलिए किसानों से वार्ता कर सरकारों को नई कृषि नीति व कुछ कानूनों में सुधार करना जरूरी है। क्षेत्रीय आधारित कृषि नीति ही देश के किसानों के हक में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
नई कृषि नीति बनने व कानूनो में सुधार होने के बाद कृषि उत्पादों की अधिक कीमत के लिए नवीन तकनीकी के प्रयोग द्वारा पोषक तत्वों की मात्रा एवं गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए किसान अधिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित हों सकते है। किसान सामने विकास के नए विकल्प खुलेंगे स्मार्ट खेती को बढ़ावा मिलेगा। आज किसानों को आवश्यकता आधारित अवधारणा से हटकर मांग आधारित खेती की एक नई शुरुआत की जरूरत है। अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय कृषि मांग के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा दिया जाना अनिवार्य है। इससे किसानों की आय में भी सुधार होगा और देश में ग्रामीण युवाओं की बेरोजगारी भी कम होगी।
वर्तमान में 60 प्रतिशत जनसंख्या खेती से गुजर बसर कर रही है किसान नेता राजवीर सिंह ने कहा कि देश में कृषि कानूनों की वापसी से महत्वपूर्ण विषय न्यूनतम समर्थन को गारंटी कानून बनाना है। संयुक्त मोर्चा में इस मांग की अनदेखी की गई है। जिससे देश का किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। किसानों ने आंदोलन को सफल बनाने हेतु तन मन धन से हर सहयोग किया लेकिन किसान नेताओं ने इसे बर्चस्व की लड़ाई बनाकर असल मुद्दो से गुमराह किया जो किसान हित में नहीं हो सकता
किसान नेता मांगेराम त्यागी जी ने कहा कि देश में एक ऐसे किसान संगठन की आवश्यकता है जो किसानों के हित में कार्य करे। हमारा नया किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) देश व् विश्वव्यापी किसान समस्याओं को लेकर चिंतन, मंथन और आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा और तथ्यों के साथ किसान हित में सरकार से संवाद करेगा।
नये किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) में संरक्षक मंडल, चेयरमैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुख्य महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्य होंगे अन्य सदस्य संगठन द्वारा गठित समितियों से चुने जाएंगे या नामित किए जाएंगे। किसी भी विषय पर राष्ट्रीय कोर समिति का निर्णय अंतिम होगा। किसी भी स्थिती में राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुख्य महासचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता राष्ट्रीय कोर समिति के अध्यक्ष नहीं बन सकते हैं। राष्ट्रीय कोर समिति को संगठन के सभी पदों की नियुक्ति और निष्कासन डिबारिंग करना एवं संगठन के किसी भी स्तर पर किए गए सभी कार्यक्रमों की देखभाल करना होगा। राष्ट्रीय कोर समिति सभी पदाधिकारियों/ अधिकारियों के कर्तव्यों और अधिकारों में किसी भी प्रकार के संशोधन /परिवर्तन के लिए पूरी तरह से सशक्त रहेगी और उसके अधिकार में (समय-समय पर ) या राज्य समितियों की सिफारिशों के अनुसार किसी भी या सभी पदों का सृजन/आवंटन करना भी रहेगा।
इस संगठन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) में यह सुनिश्चित करने की बेहतर क्रिया-विधियाँ होगी जिससे सदस्यों से लेकर नेताओं तक संगठन के सभी स्तरों पर प्रभावशाली रूप में भाग लेने व् निर्णय में योगदान करने का का अवसर मिले।
दिगम्बर सिंह ने गोष्ठी में आये किसानों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह किसान परिवारवाद से मुक्त लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हमेशा पालन करेगा। इस संगठन में गांव के अध्यक्ष को कार्य व योग्यता के आधार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर होगा| संगठन में उसकी योजनाओं सेवाओं और क्रियाकलापों की मॉनिटरिंग मूल्यांकन तथा समीक्षा के लिए बेहतर साधन हो। तथा अन्य संगठनों के बीच नेटवर्किंग द्वारा सम्पर्क हो। हमे उम्मीद है कि किसानों, खेतिहर मजदूर के सहयोग व् आशीर्वाद से यह संगठन किसानों की उम्मीदों कर खरा उतरेगा व् उनकी एक मजबूत आवाज बनकर कार्य करेगा। संगठन में सभी का स्वागत है लेकिन यह संगठन कोई राजनैतिक अखाडा नहीं होगा। संगठन में पद कार्य एवं स्क्रीनिंग के आधार पर ही सभी ऐसे ईमानदार जो किसान-हित चिन्तक हो खेतीबाडी करना जानता हो, गोबर उठाया हो , चारा काटा हो , ऐसे व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जायेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चौ. राजेन्द्र सिंह मलिक व संचालन धर्मेन्द्र मलिक ने किया। कार्यक्रम में सभी साथियों के विचार आने के उपरान्त अनिल तालान जी ने भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के अध्यक्ष पद हेतु श्री राजेश सिंह चौहान के नाम का प्रस्ताव रखा जिसका सभी किसानों ने हाथ उठाकर आम राय से समर्थन किया। राजेन्द्र सिंह मलिक द्वारा राजेश सिंह चौहान जी को अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा की गई। इसके उपरान्त राजेश सिंह चौहान द्वारा प्रस्ताव रखा गया कि चौ. राजेन्द्र सिंह मलिक जी के सहयोग बिना इतनी बडी जिम्मेदारी का निर्वाहन नहीं कर सकता मेरा प्रस्ताव है कि चौ. राजेन्द्र सिंह मलिक को संगठन का चेयरमैन व संरक्षक नियुक्त किया जाए। सभा में उपस्थित सभी किसानों ने बहुमत से हाथ उठाकर प्रस्ताव का समर्थन किया। राजेन्द्र सिंह मलिक को सर्वसम्मति से भारतीय किसान यूनियन(अराजनैतिक) का चैयरमैन व संरक्षक नियुक्त किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिन्दु कुमार , कुंवर परमार सिंह , बलराम सिंह , नितिन सिरोही , विक्रान्त सैनी, सुरेन्द्र वर्मा, विमल तोमर, योगेश प्रधान, आदर्श चौधरी, धर्मेन्द्र सिंह, महेन्द्र रन्धावां, सुनील सिंह, राज कुमार गौतम, प्रीतम सिंह, राजेन्द्र सिंह, दीपक, नीरज बालियान, बलबीर सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, सोनू, सैलू आर्या हजारों किसान चिन्तक/किसान शामिल रहे।

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