छपरौली। क्षेत्र के बौढा गांव में नकली कीटनाशक दवाइयां से किसानों की लगभग 70 बीघा फसल जलकर खराब हो गई। बौढा गांव के किसान मनोज पुत्र रतन सिंह,सेलो पत्नी जयसिंह, अंकित पुत्र नफे सिंह,व पहल सिंह के द्वारा खरीफ में करीब 60 बीघा जमीन पर धान की फसल लगाई थी। फसल को कीट-प्रकोप से बचाने के लिए बायो मशीन जो की बायो स्टैंड कंपनी की व लेमडा जे यू कंपनी की किसान के द्वारा कीटनाशक दवा खरीदकर फसल में छिड़काव किया था। जो कि हिंदुस्तान ट्रेडिंग कंपनी पानीपत से लगभग चालीस हजार रुपए की दवाईयां लेकर आए थे लेकिन करीब 60 बीघा धान की फसल दवा का स्प्रे करने के बाद पूरी तरह से नष्ट हो गयी। इससे किसानों को काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा।
उदासीनता के चलते ग्रामीण व शहरी बाजारों में नकली कीटनाशक दवाओं की बिक्री इन दिनों जोरों पर है। इन दवाओं के उपयोग से फसलों के उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इन नकली कीटनाशकों की पहचान भी भोले भाले ग्रामीण किसान नहीं कर पाते क्योंकि इनकी पैकेजिंग बिल्कुल असली कीटनाशक की तरह होती है। ऐसे किसानों को नकली या एक्सपायरी डेट की दवा होने की समझ तब आती है, जब ऐसे कीटनाशकों के छिड़काव के बाद असर प्रभावहीन होता है। ऐसे में यहां के किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने जब इस बारे में बायो स्टैंड कंपनी को जब इसकी सूचना दी तो कंपनी के टेस्टिंग मैनेजर आशीष कुमार ने मौके पर पहुंचकर धान की फसल का जायजा लिया और हर संभव मदद करने का आश्वासन भी दिया।
किसान नफे सिंह ने बताया कि किसान खेती में अपना तन मन और धन सब कुछ लगा देता है। नकली कीटनाशक के चलते अगर किसानों का फसल बर्बाद हो जाती है, तो किसान पूरी तरह टूट जाता है। और कई बार कर्ज के बोझ के चलते किसान आत्म हत्या तक करने को मजबूर हो जाता है। इस तरह के गोरखधंधा करने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस मौके पर मदन, सुरेश पाल ,किताबा,नफे सिंह ,पीतम सिंह ,रमेश, मनोज, सोनू ,सुरेंद्र ,पहल सिंह, नारायण शर्मा ,जय भगवान, बिजेंद्र सिंह,ईश्वर ,संतोष देवी व रवि तोमर आदि किसान मौजूद थे।