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कम होगा अदालतों का बोझ, एक साल की सजा वाले मामले सशर्त वापस लेगी सरकार
सरकार ने न्यायालयों में मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने की तरकीब निकाली है। सरकार ने भारतीय दंड संहिता के तहत एक साल तक की सजा वाले तीन साल से न्यायालय में लंबित मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है

सरकार ने न्यायालयों में मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने की तरकीब निकाली है। सरकार ने भारतीय दंड संहिता के तहत एक साल तक की सजा वाले तीन साल से न्यायालय में लंबित मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में गृह (विधि) विभाग के शासन सचिव ने शुक्रवार को आदेश जारी किए। सरकार यह मामले सशर्त वापस लेगी।
सरकार के इस निर्णय से सैकड़ों मामलों का निस्तारण हो सकेगा।ये मामले होंगे वापस राजस्थान राज्य विविध सेवा प्राधिकरण के प्रस्तावानुसार मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित ऐसे प्रकरण, जो कर चोरी से संबंधित नहीं हों। 31 जनवरी-2022 तक प्रथम अपराध के रूप में घटित हुए हैं, जिनमें परिवाद या आरोपपत्र न्यायालय में 12 अगस्त तक पेश हो चुका है।
यानी छह माह से अधिक पुराने हो। जुआ अधिनियम के ऐसे प्रकरण, जो न्यायालय में छह माह से अधिक अवधि से विचाराधीन हैं। इसमें ऐसे प्रकरण शामिल नहीं होंगे, जिनमें अभियुक्त मफरूर हैं। राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश 1949 की धारा 13, राजस्थान ध्वनि नियंत्रण अधिनियम 1963 की धारा 6, राजस्थान धूम्रपान निषेध और धूम्रपान न करने वालों का स्वास्थ्य संरक्षण अधिनियम 1999 की धारा 5,6,7,8,9 व 10 तथा सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनिमय) अधिनियम 2003 की धारा 4/21 एवं धारा 6/24 के प्रकरण।राजस्थान आबकारी अधिनियम 1954 के तहत दर्ज ऐसे प्रकरण, जिसमें बरामदगी अधिकतम 10 लीटर शराब। इनमें 30 जून-2022 तक न्यायालय में आरोप-पत्र पेश किया जा चुका है।



