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एकनाथ शिंदे को झटका, डिप्टी स्पीकर ने खारिज किया अविश्वास प्रस्ताव, मुंबई में धारा 144 लागू

महाराष्ट्र में सियासी खींचातान के बीच डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इससे बागी गुट का झटका लगा है। एकनाथ शिंदे गुट अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा। वहीं मुंबई में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए धारा 144 लागू हो गई है। जानकारी के मुताबिक, 10 जुलाई तक इसे शहर भर में लागू किया गया है। साथ ही इस दौरान सोशल मीडिया पर नजर रखी जाएगी।कई जगहों पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने बागी नेताओं के ठिकानों पर हमले किए है जिसके बाद यह फैसला किया गया है।

दरअसल शिवसेना कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पार्टी के बागी विधायक तानाजी सावंत के एक कार्यालय में तोड़फोड़ की, जो इस समय एकनाथ शिंदे गुट के हिस्से के रूप में गुवाहाटी में हैं। कार्यकर्ताओं का एक समूह आज सुबह कटराज इलाके में स्थित भैरवनाथ शुगर वर्क्स के कार्यालय में घुस गया और सावंत के कार्यालय को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसमें शामिल रहे पार्टी के पार्षद विशाल धनवाड़े ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “सावंत के कार्यालय में तोड़फोड़ तो बस एक शुरुआत है। हर गद्दार (बागी विधायक) के कार्यालय को आने वाले दिनों में तोड़ दिया जाएगा।”

महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री और बागी विधायक दीपक केसरकर ने खुलासा किया है कि एकनाथ शिंदे के खेमे की तरफ से शिवसेना विधायकों के समर्थन से ‘शिवसेना बालासाहेब’ नया समूह गठित किया गया है। गौरतलब है कि शिंदे गुट का दावा है कि उसके पास 40 से ज्यादा शिवसेना विधायकों और कई और निर्दलीयों का समर्थन है।

वहीं देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में शनिवार को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक शुरु हुई। पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दे पर चुप्पी साधे रहने वाली भाजपा आज कुछ निर्णय ले सकती है। फडनवीस शुक्रवार शाम से मुंबई से बाहर थे,आज सुबह लौट आए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल, आशीष शेलार और अन्य नेताओं ने बैठक में भाग लिया है। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे द्वारा अपने समूह के कई विधायकों को गुवाहाटी ले जाने के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल के बारे में आगे की कारर्वाई तय करने के लिए भाजपा मुंबई कार्यालय में बैठक शुरू हुई है।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को अपनी सरकार पर मंडराते राजनीतिक संकट से लड़ने के प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्त किया और कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा कि विद्रोही नेता का बेटा लोकसभा सांसद है, तो क्या उनके बेटे आदित्य ठाकरे को राजनीतिक रूप से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। फिलहाल दोनों पक्ष ने चार दिन पुराने गतिरोध को तोड़ने के लिए पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिये हैं। ठाकरे ने कहा कि शिंदे को शहरी विकास का प्रमुख विभाग दिया गया था, जो आमतौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री के पास रहता है।

शिवसेना में विद्रोह के लिए सार्वजनिक रूप से विपक्षी दल भाजपा को दोषी ठहराया, ‘‘जिसने उनकी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सरकार की स्थिरता को खतरा पैदा कर दिया है”। इस गठबंधन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस भी शामिल हैं। पार्टी पदाधिकारियों को आभासी रूप से संबोधित करते हुए शिवसेना अध्यक्ष ने कहा कि वह विधायकों द्वारा दलबदल से चिंतित नहीं, क्योंकि वह उन्हें एक पेड़ के रोग पीड़ित फल-फूल मानते हैं। उद्धव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आप पेड़ के फल-फूल लेते हैं। लेकिन जब तक जड़ें (पदाधिकारी और कार्यकर्ता) मजबूत हैं, तब तक मुझे चिंता करने की जरूरत नहीं है। जड़ें कभी नहीं उखड़ सकतीं। हर मौसम में नए पत्ते आते और फूल खिलते हैं।

 

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