उपभोक्ता द्वारा बिजली निगम को जमा कराई गई लाखों की राशि को किया जाए वापिस
बिजली निगम की अपील को खारिज करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय ने दिए आदेश

गुडग़ांव (अशोक): बिजली निगम की अपील का निपटारा करते हुए
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश शर्मा की अदालत ने निचली अदालत
के फैसले को बरकरार रखते हुए बिजली निगम की अपील को खारिज कर दिया है और
निगम को आदेश दिए हैं कि उपभोक्ता पर लगाए गए जुर्माने 2 लाख 42 हजार 252
रुपए का भुगतान 9 प्रतिशत ब्याज दर से उपभोक्ता को किया जाए। उपभोक्ता के
अधिवक्ता क्षितिज मेहता से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के सोहना
क्षेत्र के गांव किरनकी में अमरजीत का फार्म है। बिजली निगम ने चैकिंग के
दौरान अमरजीत पर आरोप लगाए थे कि वह बिजली की मुख्य लाईन से तार डालकर
बिजली की चोरी कर रहा था। निगम ने वर्ष 2012 की 2 फरवरी को अमरजीत पर 2
लाख 42 हजार 252 रुपए का जुर्माना भी लगा दिया था और उससे कहा गया था कि
वह जुर्माना भर दे, नहीं तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी। अमरजीत
ने अपने पार्टनर तेजेंद्रपाल सिंह मेहता के द्वारा जुर्माने की पूरी राशि
निगम में जमा करा दी थी और वर्ष 2012 की 28 मार्च को तेजेंद्रपाल सिंह ने
बिजली निगम के खिलाफ जिला अदालत में मामला भी दर्ज करा दिया था। अधिवक्ता
का कहना है कि इस मामले की सुनवाई सोहना के तत्कालीन सिविल जज महेंद्र
सिंह की अदालत में हुई और अदालत ने वर्ष 2015 की 26 नवम्बर को अपना फैसला
सुनाते हुए बिजली चोरी के मामले को गलत पाया और निगम को आदेश दिया कि जमा
कराई गई राशि को 9 प्रतिशत ब्याज दर से उपभोक्ता को वापिस की जाए। निगम
ने निचली अदालत के इस फैसले को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
जिस पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अपना फैसला सुनाते
हुए जहां बिजली निगम की अपील को खारिज कर दिया, वहीं निगम को आदेश दिए कि
निचली अदालत के फैसले के अनुसार उपभोक्ता को जमा की गई जुर्माना राशि 9
प्रतिशत ब्याज दर से वापिस की जाए। अधिवक्ता का कहना है कि बिजली निगम आए
दिन इस प्रकार के चोरी के मामले बनाता आ रहा है, जो अदालत में जाने पर
उनमें से अधिकांश गलत पाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पीडि़त उपभोक्ता
बिजली निगम के खिलाफ ह्रासमेंट का मामला दायर करने की तैयारियों में जुट
गया है।




