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ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी-इजराइली ठिकानों को बताया ‘वैध लक्ष्य’, 24 प्रांतों में हमलों से 201 मौतें

तेहरान/न्यूयॉर्क। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी और इजराइली ठिकानों को “वैध सैन्य लक्ष्य” घोषित कर दिया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरसन और यूएन सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि तेहरान तब तक आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग करता रहेगा, जब तक कथित “आक्रामकता” पूरी तरह और बिना शर्त बंद नहीं हो जाती।

उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और हवाई हमलों को “सशस्त्र आक्रमण” बताया। पत्र में कहा गया कि ईरान शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों का जवाब देने के लिए अपनी सभी आवश्यक रक्षात्मक क्षमताओं का उपयोग करेगा।

रक्षा मंत्रालय की चेतावनी

ईरान के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह अपनी सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखने के लिए पूर्ण हथियार और उपकरण समर्थन देता रहेगा, “जब तक दुश्मन की पराजय नहीं हो जाती।” मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को ऐसी कार्रवाई बताया जो अंततः उनके “विफलता और दंड” का कारण बनेगी, और “कड़ा व पछतावे योग्य जवाब” देने की चेतावनी दी।

इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक वरिष्ठ कमांडर ने दावा किया कि अब तक केवल “पुराने या सीमित” मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है और अगली प्रतिक्रिया में अधिक शक्तिशाली तथा अप्रत्याशित हथियार तैनात किए जा सकते हैं।

‘हम अपने बच्चों के कातिलों को सजा देंगे’

अराघची ने सोशल मीडिया पर अमेरिका के हमले पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान इस कार्रवाई के कारणों को नहीं समझता और संभव है कि अमेरिकी प्रशासन इसमें “खींचा गया हो।” उन्होंने चेतावनी दी, “ईरान उन लोगों को सजा देगा जो हमारे बच्चों को मारते हैं।”

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की दुश्मनी अमेरिकी जनता से नहीं है, बल्कि उन नीतियों से है जिन्हें लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी नागरिकों को “गुमराह” किया जा रहा है।

24 प्रांत प्रभावित, 201 मौतें

ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के प्रवक्ता ने मेहर समाचार एजेंसी को बताया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से देश के 24 प्रांत प्रभावित हुए हैं। अब तक कम से कम 201 लोगों की मौत और 747 के घायल होने की पुष्टि की गई है।

रेड क्रेसेंट की 220 से अधिक टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में मलबा हटाने, घायलों को अस्पताल पहुंचाने और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम जारी है।

मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों से संकेत मिलते हैं कि टकराव अभी थमता नजर नहीं आ रहा।

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