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आरक्षण नहीं तो भाजपा को कश्यप समाज 2024 में सिखाएगा सबक

कश्यप समाज आर्थिक,सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक दृष्टी से पिछडा हुआ है। समाज को मुख्य धारा मे लाने हेतू आरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। समाज द्वारा प्रदेश सरकार को समय-समय पर ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेताया गया है।

बागपत। सपा के निवर्तमान पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ प्रदेश सचिव अशोक कश्यप ने कहा कि यदि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले 2022 के मानसून सत्र में भाजपा सरकार द्वारा 17 पिछडी उप जातियों निषाद, केवट, मल्लाह बिनद,कहार,कश्यप, धीवर,रैकवार तुरैहा, प्रजापति ,धीवर,बाथम,भर,राजभर आदि को एससी जाति मे सम्मलित करने हेतू राष्ट्रपति की ओर से जारी 1950 की अधिसूचना ,यूपी की अनुसूची के अनुसार क्रमांक 18 पर अंकित बेलदार 36 पर अंकित गोंड, 53 पर अंकित मझवार, 65 पर अंकित शिल्पकार, 66 पर अंकित तुरैहा, जाति को संसद में प्रस्ताव लाकर अनुच्छेद 341 के प्रभाव से राष्ट्रपति के माध्यम से उपरोक्त पर्यायवाची जातियों को परिभाषित नही करते हैं तो उपरोक्त 15 प्रतिशत आबादी वाली जातिया जो उत्तर प्रदेश की लगभग 40 लोकसभा सीटों पर अपनी निर्णायक भूमिका रखती है। कश्यप समाज आर्थिक,सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक दृष्टी से पिछडा हुआ है। समाज को मुख्य धारा मे लाने हेतू आरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। समाज द्वारा प्रदेश सरकार को समय-समय पर ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेताया गया है। परन्तु सरकार इस दबे कुचले समाज की आवाज को दबा रही है, जिसका खामियाजा भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनाव 2024 मे अवश्य भुगतना पड़ेगा।

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