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अतिशय क्षेत्र सरूरपुर में धार्मिक शिक्षण शिविर प्रारंभ

बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं, बच्चे ही संस्कृति को निर्बाध रूप से आगे पहुंचाने में सहायक होंगे।इसलिए आज उनको संस्कारित करना आवश्यक है।

बागपत। प्राचीन श्री 1008 नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सरूरपुर कला में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आचार्य श्री विद्यासागर जी, वसुनंदी जी, विशुद्ध सागर जी व विनिश्चयसागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद एवं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से पधारे अक्षत शास्त्री, अक्षांश शास्त्री द्वारा एवं बाल ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में जैन धर्म की शिक्षा नैतिक संस्कार का बीजारोपण करने की भावना से एक जैन धार्मिक शिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बच्चों को प्रतिदिन जैन धर्म और उनके सिद्धांतों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। साथ ही साथ दैनिक कर्तव्य दैनिक जीवन के नियमों का किस प्रकार पालन हो, यह सभी शिक्षाएं दी जा रही है। क्योंकि गुरु कहते हैं कि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं, बच्चे ही संस्कृति को निर्बाध रूप से आगे पहुंचाने में सहायक होंगे।इसलिए आज उनको संस्कारित करना आवश्यक है। अगर आज बीजारोपण नहीं हुआ तो भविष्य में फल प्राप्त कैसे होंगे।
शिविर संयोजक के रूप में गौरव जैन एवं समस्त नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी अपना पूर्ण सहयोग दे रही है। सकल जैन समाज से लगभग 75 बच्चे और 15 महिलाएं इस शिविर में हिस्सा ले रहे है। प्रतिदिन बच्चों को पुरस्कार बांटे जा रहे हैं।

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