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अंबिकापुर : मैनपाट में 20 मिनट की ओलावृष्टि से सफेद चादर, फसलें चौपट; तीन दिन तक बारिश-ओले का अलर्ट

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। मैनपाट में मंगलवार रात करीब 20 मिनट तक हुई तेज ओलावृष्टि से सड़कों और खेतों में बर्फ जैसी सफेद चादर बिछ गई। इस अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आम, महुआ और सब्जी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

सरगुजा संभाग में बीते दो दिनों से मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। घने बादलों और रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच मंगलवार रात मैनपाट में तेज ओलावृष्टि ने हालात बदल दिए। देर शाम से चल रही तेज हवाओं और बूंदाबांदी के बाद रात करीब पौने 11 बजे मौसम अचानक बिगड़ गया और तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे।

करीब 20 मिनट तक चली ओलावृष्टि के दौरान मैनपाट के कई इलाकों में सड़कों, खेतों और मैदानों पर ओलों की मोटी परत जम गई। पूरा क्षेत्र सफेद चादर से ढंका नजर आया। हालांकि देर रात होने के कारण लोग घरों में ही रहे और किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली। मैनपाट के अलावा सीतापुर और आसपास के क्षेत्रों में भी हल्की ओलावृष्टि और बारिश दर्ज की गई। इससे पहले सोमवार को सूरजपुर, उदयपुर (सरगुजा) और बलरामपुर के कुछ इलाकों में भी अच्छी बारिश हुई थी।

मौसम विभाग ने सरगुजा संभाग के लिए अगले तीन दिनों तक बारिश और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार इस दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे, बीच-बीच में तेज हवाएं चलेंगी और कुछ स्थानों पर ओले गिर सकते हैं।

नवंबर के बाद पहली बार हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन क्षेत्रों में ओले गिरे हैं, वहां आम, लीची और महुआ की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस समय आम के पेड़ों में बौर और छोटे फल आ रहे हैं, जबकि महुआ गिरना शुरू हो चुका है। ऐसे में मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

इसके अलावा सब्जी फसलों, खासकर टमाटर की खेती को भी ओलों से नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

लगातार बादल छाए रहने के कारण अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अंबिकापुर में जहां कुछ दिन पहले तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर करीब 33-34 डिग्री के आसपास आ गया है।

वहीं न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम में इस बदलाव ने जहां गर्मी से कुछ राहत दी है, वहीं ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

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