होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराया संकट: जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सैन्य मदद से पीछे खींचे हाथ, ईरान की नई मिसाइल ने दुनिया को दहलाया

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध के सत्रहवें दिन वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस समुद्री मार्ग की रक्षा के लिए सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने की अपील को जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे करीबी रणनीतिक साझेदारों ने फिलहाल सिरे से खारिज कर दिया है। इस इनकार ने वॉशिंगटन की रणनीतियों को बड़ा झटका दिया है और आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों के गठबंधन में दरार पड़ने की आशंकाएं तेज हो गई हैं।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन तमाम देशों को निशाने पर लिया था जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रूट का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था कि जो देश यहां से तेल और गैस ले जाते हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। हालांकि, जापान की प्रधानमंत्री सना ताकाइची ने संसद में स्पष्ट कर दिया कि टोक्यो का अपनी नौसेना भेजने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इसी सुर में अपनी बात रखते हुए इस क्षेत्र में सैन्य योगदान देने से मना कर दिया है। सहयोगी देशों के इस रुख से नाराज ट्रम्प ने नाटो देशों को भी चेतावनी दे डाली है कि यदि वे होर्मुज को खुला रखने में सहयोग नहीं करते हैं, तो इस सैन्य गठबंधन का भविष्य बेहद अंधकारमय हो सकता है।

जंग के मैदान से आ रही खबरें और भी डरावनी हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पहली बार इजराइल के सैन्य ठिकानों पर अपनी सबसे घातक सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल का प्रहार किया है। सॉलिड-फ्यूल तकनीक से लैस यह मिसाइल ढाई हजार किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है, जिसकी जद में न केवल पूरा मध्य-पूर्व बल्कि दक्षिण-पूर्वी यूरोप और पश्चिमी चीन के साथ भारत के भी कुछ हिस्से आ सकते हैं। इस मिसाइल की सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति और लॉन्च करने की कम समयावधि है, जिससे रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना अत्यंत कठिन हो जाता है। ईरान के इस कदम ने वैश्विक स्तर पर परमाणु और मिसाइल युद्ध की चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है।

इसी युद्ध की छाया के बीच संयुक्त अरब अमीरात में एक अलग तरह की कानूनी कार्रवाई देखने को मिली है। यूएई प्रशासन ने डिजिटल स्पेस पर कड़ी निगरानी बरतते हुए उन्नीस भारतीयों सहित पैंतीस लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की मदद से युद्ध के फर्जी वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने की कोशिश की। अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित सुनवाई कर कड़ी सजा दी जाएगी। कुल मिलाकर होर्मुज मार्ग पर जारी यह गतिरोध यदि लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें डेढ़ सौ डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया और भयावह तूफान आना तय माना जा रहा है।



