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हाई कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में मांगा जवाब

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (एएजेएमआई) के अध्यक्ष शिफा-उर-रेहमान के जमानत की अर्जी पर सुनवाई के बाद अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा है जिसे वर्ष 2020 में दिल्ली दंगों के मामले में बड़ी साजिश रचने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (एएजेएमआई) के अध्यक्ष शिफा-उर-रेहमान के जमानत की अर्जी पर सुनवाई के बाद अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा है जिसे वर्ष 2020 में दिल्ली दंगों के मामले में बड़ी साजिश रचने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।

रहमान को कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), शस्त्र अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत गिरफ्तार किया गया था।

रहमान ने निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन करते हुए आरोप लगाया था कि वह जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व छात्र संघ के एकमात्र सदस्य है, जिनका नाम प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के लिए दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में शामिल किया गया। एएजेएमआई के अन्य पदाधिकारियों में से किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है।

रहमान के अधिवक्ता ने आग्रह किया कि प्रदर्शनकारी होना कोई अपराध नहीं है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है।

अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत में रेहमान की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि दंगों की सुनियोजित योजना बनाई गई थी, संपत्तियों को नष्ट किया गया , आवश्यक सेवाओं को बाधित किया गया था। दंगों में पेट्रोल बमों, लाठी, पत्थरों का उपयोग किया गया था।

उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान 53 लोगों की जान गयी, जिसमें पहले चरण की हिंसा में 142 लोग घायल हो गए। जबकि दूसरे चरण में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम(सीएए) विरोधी प्रदर्शनों पर भड़के दंगे में 608 लोग घायल हुए थे।

अभियोजन पक्ष ने खुलासा किया कि 2020 के धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, जिसमें 25 मस्जिदों के करीब रणनीतिक विरोध स्थलों को चुना गया था और 20 दिसंबर, 2019 की बैठक में उमर खालिद ने हर्ष मंदर, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य, स्वतंत्र नागरिक संगठन सहित अन्य लोगों के साथ दंगे में शामिल हुए थे।.

अभियोजन पक्ष ने कहा कि विरोध का मुद्दा सीएए या एनआरसी नहीं बल्कि सरकार को शर्मिंदा करने और ऐसे कदम उठाने का था कि यह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में छा जाए।

इस मामले में पिंजरा तोड़ सदस्यों और जेएनयू छात्राओं देवांगना कलिता और नताशा नरवाल के खिलाफ एक मुख्य आरोप पत्र दायर किया गया था। जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा, कांग्रेस पार्षद इशरत जहां, जामिया समन्वय समिति के सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर और शिफा-उर-रहमान, निलंबित आप पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी, शादाब अहमद, तसलीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान और अतहर खान शामिल थे।

जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और जेएनयू के छात्र शरजील इमाम के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया गया था।

उच्च न्यायालय की खंड पीठ न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिश दायल ने दलीलें सुनने के बाद अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा।

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