सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वकील विक्रम सिंह के खिलाफ दर्ज मामले की जांच पर रोक लगाई

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली के वकील विक्रम सिंह के खिलाफ दर्ज मामले की जांच पर रोक लगा दी है। इसके पहले उच्चतम न्यायालय

ने वकील विक्रम सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्हें 13 नवंबर को रात 8.30 बजे ही रिहा किया गया था।

अधिवक्ता विक्रम सिंह जुलाई, 2019 से दिल्ली बार काउंसिल में रजिस्टर्ड हुए थे। उन्हें 31 अक्टूबर को हरियाणा एसटीएफ ने बिना किसी लिखित आधार या स्वतंत्र गवाह के गिरफ्तार किया। उन्हें फरीदाबाद जेल में रखा गया था। कोर्ट में उनके वकील विकास सिंह ने कहा था कि एक वकील को उसके पेशेवर काम करने के लिए फंसाया गया है। उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली की निचली अदालतों के बार एसोसिएशंस की कोआर्डिनेशन कमेटी 6 नवंबर को हड़ताल का आह्वान किया था। कमेटी ने भी कहा था कि विक्रम सिंह को एक झूठे मामले में फंसाया गया है।
याचिका में कहा गया था कि फरीदाबाद की एक ट्रायल कोर्ट ने 1 नवंबर को उन्हें एक मैकेनिकल और बिना किसी बयान के आदेश से 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिसमें उन्हें कथित अपराधों से जोड़ने वाला कोई तर्क या मटीरियल नहीं था। याचिका में हरियाणा और दिल्ली सरकारों के अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पक्षकार बनाया गया। याचिका में विक्रम सिंह के खिलाफ एसटीएफ की कथित अवैध कार्रवाईयों की न्यायिक जांच की मांग की गई। याचिका में कहा गया था कि बार की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बजाय जांच एजेंसी ने याचिकाकर्ता के अपने मुवक्किलों के साथ पेशेवर जुड़ाव को आपराधिक बनाने की कोशिश की गई है। इससे कानून के शासन और वकील और मुवक्किल संबंधों की पवित्रता को ठेस पहुंच रही है।



