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सहारनपुर: अंतिम संस्कार से रोकने पर 11 परिवारों की धर्मवापसी, पंचायत के बाद श्मशान में हुआ दाह संस्कार

सहारनपुर।जनपद के थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव पीकी में एक महिला की मौत के बाद उपजे विवाद ने बड़ा मोड़ ले लिया। ईसाई धर्म अपना चुके 13 परिवारों में से 11 परिवारों ने सामूहिक रूप से पुनः हिंदू धर्म में वापसी की घोषणा की। यह निर्णय गांव में बुलाई गई एक आपातकालीन पंचायत के बाद लिया गया, जब ग्रामीणों ने मृतका का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में करने से रोक दिया था।

मामला गांव पीकी निवासी राम सिंह के परिवार से जुड़ा है। राम सिंह और गांव के 12 अन्य अनुसूचित जाति के परिवारों ने कुछ वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपना लिया था। इस धर्म परिवर्तन के कारण गांव के अन्य हिंदू परिवार उनसे नाराज चल रहे थे। बृहस्पतिवार रात राम सिंह की पत्नी मामचंदी का निधन हो गया। जब परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाने की तैयारी करने लगे, तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट तर्क था कि यदि परिवार ने ईसाई धर्म अपनाया है, तो अंतिम संस्कार भी उसी पद्धति से कब्रिस्तान में होना चाहिए।

गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए रविदास मंदिर में एक पंचायत बुलाई गई, जिसमें अनुसूचित जाति समाज के लोग और धर्म परिवर्तन करने वाले परिवार शामिल हुए। काफी देर तक चले विचार-विमर्श के बाद 13 में से 11 परिवारों के लगभग 50 सदस्यों ने अपनी मर्जी से मूल धर्म में वापसी का फैसला लिया। हालांकि, दो परिवारों ने अपने वर्तमान धर्म पर अडिग रहने की बात कहते हुए धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया।

पंचायत में 11 परिवारों की घर वापसी की घोषणा के बाद ग्रामीण शांत हुए और सहमति बनी। इसके उपरांत ही मामचंदी के शव का हिंदू रीति-रिवाज के साथ गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार संपन्न हो सका। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव में पुलिस बल भी सतर्क रहा ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। फिलहाल गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है, लेकिन इस सामाजिक घटना की चर्चा पूरे जनपद में हो रही है।

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