श्री पार्श्वनाथ विधान की पूजन की, उत्तम सत्य धर्म अंगीकार किया
आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया।
बागपत। आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया।
मुनि संघ के सानिध्य मे श्रधालुओ ने भगवान शांतिनाथ, अजितनाथ और महावीर भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया. शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र सौरभ जैन व विपिन जैन को प्राप्त हुआ आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया। संगीतकार द्वारा न्हवन के समय गाये भजन मैने प्रभुजी के चरण पखारे ने सभी को आत्म विभोर कर दिया आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया।
पूजन मे समुचय देव शास्त्र गुरु पूजन, भगवान पार्श्वनाथ पूजन, सोलह कारण पूजन, नंदीश्वर दीप, दसलक्षण की पूजन की गयी आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया। आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया।
सौधर्म इंद्र सौरभ जैन द्वारा मंडल पर 64 अर्घ समर्पित किये गए. विधानाचार्य पंडित राजकिन्ग ने दान की महिमा के संबंध मे सभी को बताया. और सभी को अधिक से अधिक दान देने के लिए प्रेरित किया आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के पाचवे दिन, अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे श्री पारस नाथ विधान का आयोजन किया गया।
विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते हुए मुनि विशुभ्र सागर जी महाराज ने आज के धर्म उत्तम सत्य धर्म के विषय मे बताया. उन्होंने कहा कि सत्य धर्म से तात्पर्य सिर्फ सत्य वचन बोलना ही नही है. सत्य, धर्म और सत्य वचन दोनो भिन्न भिन्न हैं. झूठ नही बोलना, जैसा देखा, सुना, जाना वैसा बोलने को सत्य कहा जाता है. आत्मा भी एक द्रव है. इसलिए वह सत् स्वभावी है.
सत्स्वभावी आत्मा के अनुभव से आत्मा मे जो शांति स्वरूप वीतराग परिनति उत्पन्न होती है, उसे सत्य धर्म कहते हैं. अपने अंतर मे विद्यमान ज्ञानानंद स्वभाव से उत्पन्न हुआ ज्ञान, श्रधा, एवं वीतराग परिनति ही उत्तम सत्य धर्म है और वही मोक्ष का कारण है.
सभा मे सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, बाल्किशन जैन, विकास जैन, हंस कुमार जैन,अनिल जैन, अशोक जैन, आशीष जैन, संजय जैन, अंकुर जैन आदि उपस्थित थे
शाम 7 बजे से सभागार मे प्रतिक्रमण, आरती और उसके बाद युवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया.
कवि सम्मेलन का संचालन युवा कवि हिमांशु अलंकार द्वारा किया गया. कवि सम्मेलन मे युवा कवि अमन जैन,अमृता अमृत, अमन मित्तल,चीनू जैन, वंदना गुप्ता , यशस्वी जैन, अक्षरा शर्मा द्वारा किये काव्य पाठ को विशेष रूप से सराहा गया. कवियो का सम्मान, राजेश जैन खाद वालो के द्वारा किया गया।


