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लज्जा, वाणी और संस्कार, नारी का इनसे श्रृंगार: डॉ शस्या तोमर

आवासीय शिविर में आर्या बेटियों ने योग, प्राणायाम तथा आत्मरक्षा के सीखे गुर

बडौत। नारी की सबलता और सफलता का मार्ग उसके संस्कारों पर निर्भर है। लज्जा, वाणी और संस्कार के समन्वय से नारी जाति स्वत: ही श्रृंगार से विभूषित हो जाती है। यह कहना है डॉ शस्या तोमर का, जो आज बेटियों के लिए आयोजित चरित्र निर्माण व योग शिविर में प्रेरक व्याख्यान दे रही थी।

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वाधान में चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल में चल रहे आर्य वीरांगना योग एवं चरित्र निर्माण आवासीय शिविर के छठे दिन शिक्षिका सुमेधा आर्या ने जहां बेटियों को सूर्य नमस्कार ,भूमि नमस्कार, प्राणायाम, भाला एवं तलवार का अभ्यास कराते हुए व्यक्तित्व विकास का पाठपढ़ाया, वहीं डॉ शश्या तोमर ने बेटियों से कहा, नारी के लिए सुसंस्कार ही सौन्दर्य है। संस्कारों से पूर्ण होना ही नारी के आभूषण हैं। वर्तमान समय में बेटियों को बनावटी सौन्दर्य की अपेक्षा अच्छी विचारधारा का संग्रह करना चाहिए। अच्छे विचारों के द्वारा ही आप अपना लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर सकती हैं।

जिला मंत्री रवि शास्त्री ने कहा ,जिस प्रकार से व्यक्ति शरीर को चलाने के लिए भोजन करता है। ठीक उसी प्रकार से हमें मन की शांति के लिए प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। ऐसा करने से हम शांति के साथ अपने जीवन के सफर को आगे बढ़ाते हुए लक्ष्य की प्राप्ति तक पहुंच सकेंगे।

इस अवसर पर सविता आर्या, राजेश उज्जवल, मीनाक्षी सिसोदिया,शिखा शास्त्री, ज्योति, कपिल आर्य, धर्मपाल त्यागी, वेद प्रकाश, सुरेश आर्य, रामपाल तोमर आदि उपस्थित रहे।

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