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लखनऊ: शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी पुलिस से भिड़े, हाथ-पैर पकड़कर बस में भरकर इको गार्डन ले जाया गया

लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी पुलिस से भिड़ गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने हाथ-पैर पकड़कर अभ्यर्थियों को बस में भरकर इको गार्डन ले गई।

करीब 50 अभ्यर्थी सोमवार सुबह डिप्टी सीएम के आवास घेरने के लिए सपा कार्यालय के बाहर जुटे थे। प्रदर्शनकारी ‘मैं अभागा पिछड़ा, दलित हूं’ और ‘सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है’ जैसे संदेशों वाले बैनर लेकर पहुंचे थे। जैसे ही वे सपा कार्यालय से आगे बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस पर उनके बैनर फाड़ने का आरोप लगाकर प्रदर्शनकारी हंगामा करने लगे। पहले पुलिसवालों से जोरदार बहस हुई और फिर धक्का-मुक्की हो गई। यह हंगामा करीब 20 मिनट तक चला।

अभ्यर्थियों ने कहा कि वे रोज प्रदर्शन करेंगे और देखते हैं कि पुलिस कब तक उन्हें रोक सकती है। उनका कहना था कि दो साल से संघर्ष करने के बावजूद उन्हें कोई फायदा नहीं मिला। वे आरोप लगाते हैं कि अनुप्रिया पटेल और केशव मौर्य पिछड़ों के नाम पर कलंक हैं और केवल अपनी कुर्सी बचा रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना था कि अगर नेता मजबूती से खड़े होते तो उन्हें अब तक नौकरी मिल चुकी होती।

अभ्यर्थी अमित मौर्य ने बताया कि दो साल में कोर्ट में 30 से ज्यादा तारीखें लगी हैं। सरकार की तरफ से वकील ने सुप्रीम कोर्ट में सही पैरवी नहीं की। एक तारीख पर 10 लाख रुपए खर्च होते हैं, और वे किसान परिवार से आते हैं। उनका कहना था कि अपना खेत और राशन बेचकर वे वकील की फीस भर रहे हैं।

देवरिया के धनंजय गुप्ता ने कहा कि पांच साल से वे सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। उनका आरोप था कि केशव मौर्य पार्टी में भी उनकी बात नहीं सुन रहे। एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सवर्णों के लिए फैसला एक दिन में कर दिया, जबकि पिछड़ा-दलित 85 प्रतिशत के लिए 10 महीने से कोई फैसला नहीं आया।

आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस भर्ती में OBC को 27 प्रतिशत की जगह केवल 3.86 प्रतिशत और SC को 21 प्रतिशत की जगह 16.2 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। विवाद बढ़ने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6800 पदों की चयन सूची रद्द कर दी थी और इसे संशोधित करने का आदेश दिया गया। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जहां सुनवाई जारी है। अभ्यर्थी पुनर्मूल्यांकन और नई मेरिट लिस्ट की मांग करते हुए प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।

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