यूजीसी कानून भाजपा का एक और जुमला है: सांसद हरेंद्र मलिक

मुजफ्फरनगर। यूजीसी कानून को लेकर बढ़ते विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुजफ्फरनगर से सांसद हरेंद्र मलिक ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यूजीसी कानून भी भाजपा का एक और जुमला है, ठीक वैसे ही जैसे पहले 15 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन पूरा नहीं हुआ।

सांसद मलिक ने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत और धार्मिक विद्वेष फैलाकर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाना चाहती है। उन्होंने कहा कि बढ़ती फीस, महंगी दवाइयां, रोजगार की कमी, सस्ती पढ़ाई और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण सवालों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कानून सामने लाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह फेल हो चुकी है।

बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा इस्तीफा देने के घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए हरेंद्र मलिक ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को गहरी मानसिक पीड़ा होती है, तभी वह ऐसा कदम उठाता है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि असली फूट तब होनी चाहिए थी, जब 750 किसान शहीद हुए, एमएसपी की गारंटी नहीं दी गई और बच्चों की फीस बढ़ी व युवाओं से रोजगार छीना गया।
सांसद ने कहा कि समाजवादी पार्टी पीडीए के उत्थान की बात करती है और सभी वर्गों के बच्चों के लिए रोजगार, सस्ती पढ़ाई और बेहतर भविष्य की मांग करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा कभी जातीय विद्वेष फैलाने की राजनीति नहीं करती। उनका कहना था कि सरकार केवल जुमलों के सहारे देश चला रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
हरेंद्र मलिक ने डॉलर की बढ़ती कीमत और धार्मिक मामलों को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश साधु-संतों, सूफियों और गुरुओं की परंपरा वाला है और शंकराचार्य जैसे संतों के साथ जिस तरह का व्यवहार हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्म को राजनीति का औजार बनाने का काम नहीं होना चाहिए।
अंत में सांसद ने चेतावनी दी कि सरकार अगर सच में जनता के हित में काम करना चाहती है तो जुमलों की राजनीति छोड़कर रोजगार, शिक्षा और महंगाई जैसे असली मुद्दों पर ध्यान दे।



