‘यादव हो, कथा नहीं कह सकते’, कथावाचक से बदसलूकी, बाल काटे, पीटा और गांव से भगाया

थाना बकेवर क्षेत्र के ग्राम दादरपुर में 21 जून को एक भागवत कथा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में कथावाचक मुकुट मणि और आचार्य संत सिंह कथा वाचन कर रहे थे। आयोजन के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कथावाचकों की जाति को लेकर आपत्ति जताई। आरोप लगाया गया कि कथावाचकों ने स्वयं को ब्राह्मण बताकर कथा का आयोजन किया, जबकि वे अन्य जाति से हैं। इसी विवाद ने तूल पकड़ा और कुछ लोगों ने कथावाचकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इतना ही नहीं, उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके बाल भी काट दिए गए। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो किसी ने बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
जांच के बाद पीड़ित कथावाचकों की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों आशीष (21 वर्ष), उत्तम (19 वर्ष), प्रथम उर्फ मनु (24 वर्ष) और निक्की (30 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। इनमें निक्की पर कथावाचकों के बाल जबरन काटने का मुख्य आरोप है। सभी आरोपियों को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जाति के नाम पर शर्मनाक बर्ताव
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह घटना बकेवर थाना क्षेत्र के एक गांव में आयोजित भागवत कथा के दौरान हुई, जहां कथावाचक के साथ कथित तौर पर मारपीट, अपमानजनक व्यवहार और उनकी चोटी काटने की घटना हुई। सुबह से ही सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और शिकायत के आधार पर हमने कार्रवाई शुरू कर दी है। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गई है, जो इस मामले की गहन विवेचना कर रही है। पीड़ित की पहचान कर ली गई है और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

पीड़ित की जुबानी सुनें पुरी घटना
पीड़ित ने बताया कि हमले के दौरान उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उन पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया। उनके पास मौजूद चार अंगूठियां में से तीन जबरन ले ली गईं, जबकि एक वापस कर दी गई। पीड़ित ने कहा, “हमें लात-घूसों से मारा गया, पैर छूने के लिए मजबूर किया गया, और फिर मेरी और आचार्य जी की चोटी काट दी गई। इसके बाद हमें गांव से भगा दिया गया। वजह सिर्फ यह थी कि हम यादव जाति से हैं। आयोजकों ने शुरू में उनकी जाति नहीं पूछी थी। कथा शुरू होने के बाद जब जाति का पता चला तो उन्होंने कहा हमें ब्राह्मण गुप्ता चाहिए था। तुम शूद्र हो, कथा नहीं कह सकते। हमने कहा कि आपने पहले जाति क्यों नहीं पूछी? हमने कभी अपनी जाति नहीं छिपाई। हमने साफ कहा कि हम यादव हैं, आप चाहें तो पता कर लें। इसके बाद उन्होंने हमारे साथ अमानवीय व्यवहार किया।”



