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मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर बहुत नजदीक से देखना बच्चों के लिए हो सकता है घातक
आंखें शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण और नाजुक अंग है। आंखों के बिना जीवन बेरंग सा है। इसलिए बहुत जरूरी है कि आंखों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। विशेषकर बच्चों के आंखों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी है।
आंखें शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण और नाजुक अंग है। आंखों के बिना जीवन बेरंग सा है। इसलिए बहुत जरूरी है कि आंखों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। विशेषकर बच्चों के आंखों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी है। अगर बच्चा आंखों को सिकोड़कर देखता है, आंखों को बार-बार रगड़ता है, पढ़ते या फिर टीवी देखते वक्त एक ओर सिर को झुकाकर देखता है, मोबाइल, टीवी या कम्प्यूटर बहुत नजदीक से देखता है, किताब बहुत ही पास से पढ़ता है, लगातार आंखों में और सिर में दर्द की शिकायत रहती है तो बिना देर किए आंखों की जांच करानी चाहिए। बच्चों के आंखों की समस्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जाता है। इसी कड़ी में बीते दिनों बाल नेत्र सुरक्षा कार्यक्रम संचालित किया गया। राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 9741 स्कूलों के 8.4 लाख से अधिक 6 से 15 साल के बच्चों का नेत्र परीक्षण किया गया। 28193 बच्चों में दृष्टिदोष पाया गया। अंधत्व निवारण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की ओर से बाल नेत्र सुरक्षा के प्रति विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां स्कूली छात्रों के आंखों की जांच एक अभियान चलाया जाता है।
बच्चों में इन बीमारियों की जांच
बाल नेत्र सुरक्षा सप्ताह के तहत स्कूली बच्चों के नेत्र परीक्षण के दौरान दृष्टिदोष की जांच हुई और आवश्यकतानुसार बच्चों को निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया। इसके अलावा बच्चों में विटामिन ए की कमी, नवजात अंधत्व समस्या, एलर्जी, नेत्र संक्रमण, नेत्र इंज्युरी, जन्मजात मोतियाबिंद, निकट दृष्टिदोष (मायोपिया), दूर दृष्टिदोष (हाइपर मेट्रोपिया), विज़न डिवलपमेंट डिसआर्डर एम्बलायोपिया की जांच कर उचित परामर्श दिया गया।
बच्चों में इन बीमारियों की जांच
बाल नेत्र सुरक्षा सप्ताह के तहत स्कूली बच्चों के नेत्र परीक्षण के दौरान दृष्टिदोष की जांच हुई और आवश्यकतानुसार बच्चों को निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया। इसके अलावा बच्चों में विटामिन ए की कमी, नवजात अंधत्व समस्या, एलर्जी, नेत्र संक्रमण, नेत्र इंज्युरी, जन्मजात मोतियाबिंद, निकट दृष्टिदोष (मायोपिया), दूर दृष्टिदोष (हाइपर मेट्रोपिया), विज़न डिवलपमेंट डिसआर्डर एम्बलायोपिया की जांच कर उचित परामर्श दिया गया।
इन बातों का रखें ख्याल
– बच्चों को गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल न करने दें।
– जिन बच्चों को चश्मा लगा है उन्हें नियमित चश्मा पहनने के लिए प्रेरित करें।
– बच्चों को संतुलित और पोषक भोजन जैसे हरे पत्तेदार सब्जियां, पीले फल खाने की आदत डालें।
– प्रतिदिन 6-8 गिलास पानी पीने के लिए बच्चों को प्रेरित करें।
– बच्चों को पूरी नींद लेने दें।
– बच्चों को झुककर या लेटकर न पढ़ने दें।
– टेबल-कुर्सी का इस्तेमाल कर पढ़ने की सलाह दें।
– पढ़ते वक्त पूरी रोशनी हो इसका ध्यान रखें।
– आंखों की नियमित रूप से जांच कराएं और थोड़ी सी भी आंखों में तकलीफ होने पर उन्हें फौरन नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं।
– बच्चों को गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल न करने दें।
– जिन बच्चों को चश्मा लगा है उन्हें नियमित चश्मा पहनने के लिए प्रेरित करें।
– बच्चों को संतुलित और पोषक भोजन जैसे हरे पत्तेदार सब्जियां, पीले फल खाने की आदत डालें।
– प्रतिदिन 6-8 गिलास पानी पीने के लिए बच्चों को प्रेरित करें।
– बच्चों को पूरी नींद लेने दें।
– बच्चों को झुककर या लेटकर न पढ़ने दें।
– टेबल-कुर्सी का इस्तेमाल कर पढ़ने की सलाह दें।
– पढ़ते वक्त पूरी रोशनी हो इसका ध्यान रखें।
– आंखों की नियमित रूप से जांच कराएं और थोड़ी सी भी आंखों में तकलीफ होने पर उन्हें फौरन नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं।



