मुजफ्फरनगर में गोमाता पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ का विशेष प्रदर्शन, संतों ने गो-संरक्षण का दिया संदेश

मुजफ्फरनगर। गोमाता के महत्व और गो-संरक्षण की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मुजफ्फरनगर में गोमाता पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ का विशेष प्रदर्शन किया गया। यह आयोजन माया मल्टीप्लेक्स में संपन्न हुआ, जिसमें शुक्रतीर्थ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों संत-महात्माओं ने सहभागिता की और फिल्म का अवलोकन किया।
यह फिल्म राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सौजन्य से प्रदर्शित की गई, जिसमें गोमाता की विशेषताओं, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व तथा गो-संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। फिल्म भारतीय परंपरा में गाय को माता के रूप में पूजने की सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है।
फिल्म प्रदर्शन के उपरांत संत-महात्माओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गोसेवा भारतीय धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग है। संतों ने गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग की तथा पूरे देश में गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
संतों का कहना था कि गो-संरक्षण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है, जिसे अपनाकर ही समाज का संतुलित विकास संभव है। कार्यक्रम के माध्यम से गोमाता के प्रति श्रद्धा और संरक्षण की भावना को और अधिक मजबूत करने का संदेश दिया गया। जानकारी के अनुसार
गो-संरक्षण और सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से मुजफ्फरनगर में फिल्म ‘गोदान’ का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार द्वारा गो-संरक्षण के लिए गोशालाओं के निर्माण की सराहना करते हुए गो-कटान पर सख्त रोक लगाने की मांग की, ताकि गौ-वंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय मंत्री अमित राठी, संघ के पदाधिकारी अमरीश गोयल तथा माया मल्टीप्लेक्स के मालिक प्रणव गर्ग भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संत-महात्माओं का पुष्पमालाएं अर्पित कर स्वागत किया।
फिल्म प्रदर्शन से पूर्व संत-महात्माओं द्वारा गौ-माता का विधिवत पूजन किया गया। इस दौरान गो-संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय संस्कृति की आत्मा बताया गया। संतों ने कहा कि गाय केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और करुणा का प्रतीक है।
यह आयोजन गौ-माता के प्रति श्रद्धा और भारतीय संस्कृति में गाय की भूमिका को और अधिक सशक्त करने का माध्यम बना। संत-महात्माओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘गोदान’ 6 फरवरी 2026 से देशभर में रिलीज हुई है, जो गो-संरक्षण, सनातन मूल्यों और करुणा का संदेश जन-जन तक पहुँचा रही है। मुजफ्फरनगर में हुए इस विशेष प्रदर्शन से स्थानीय स्तर पर गो-भक्ति और जनजागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।




