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मित्सोताकिस और PM मोदी ने भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी को मजबूत करने का दोहराया संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ग्रीक समकक्ष किरियाकोस मित्सोताकिस ने भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। ग्रीस के प्रधानमंत्री ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को फोन किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ग्रीक समकक्ष किरियाकोस मित्सोताकिस ने भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। ग्रीस के प्रधानमंत्री ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को फोन किया था। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने हाल की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद द्विपक्षीय संबंधों में आई प्रगति की सराहना की और समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, यह बातचीत शनिवार को हुई।

ग्रीस के प्रधानमंत्री मित्सोताकिस ने जून में हुए लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की पुनर्निर्वाचित होने पर बधाई दी और भारत-ग्रीस संबंधों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जताई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बातचीत के बारे में लिखा, “कल, पीएम किरियाकोस मित्सोताकिस के साथ सार्थक बातचीत हुई। हमने भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। हमारा लक्ष्य व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी में सहयोग को और मजबूत करना है। ग्रीस भारत का यूरोपीय संघ में एक महत्वपूर्ण साथी है।”

इस बातचीत के दौरान, इस साल की शुरुआत में पीएम मित्सोताकिस की भारत यात्रा के फॉलो-अप के रूप में, व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति पर भी चर्चा हुई।

पीएमओ के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर के विकास पर भी विचार किया और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों, खासकर पश्चिम एशिया में हो रहे बदलावों पर चर्चा की।

इस साल की शुरुआत में, ग्रीस के प्रधानमंत्री ने भारत का दौरा किया था और नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। इस दौरे में दोनों नेताओं ने कनेक्टिविटी, खासकर समुद्री कनेक्टिविटी और आईएमईसी जैसे गलियारों के माध्यम से साझेदारी को महत्व दिया।

आईएमईसी पर हुई चर्चा भारत और ग्रीस के बीच मजबूत कनेक्टिविटी की दिशा में थी, जिसमें सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया गया जो इस कनेक्टिविटी को और बेहतर कर सकते हैं।

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