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मामौर झील तोड़ रही किसानों के अरमान

तीन सप्ताह से क्षतिग्रस्त झील की मेड़ नहीं हुई दुरूस्त, किसान बेबस, हुक्मरानों को नहीं सरोकार

कैराना। किसानों के लिए नासूर बनी मामौर झील की समस्या अरमान तोड़ रही है। पिछले तीन सप्ताह से झील की मेड़ टूटी हुई है, लेकिन प्रशासन उसे दुरूस्त नहीं करा सका है। किसानों की फसल निरंतर बर्बाद हो रही है। बेबस किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। विगत 26 अप्रैल को पानी का अत्यधिक दबाव के कारण मामौर झील की मेड़ टूटने से किसानों की करीब पांच सौ बीघा भूमि में गंदा पानी भर गया था, जिससे ईंख व धान की फसल के अलावा भूसे के लिए छोड़े गए गेंहू के अवशेष भी पूरी तरह डूब गए थे। पिछले 21 दिनों से झील की मेड़ ज्यों की त्यों टूटी हुई है और झील का गंदा पानी खेतों में निरंतर भरता जा रहा है। दो या तीन किसान कड़ी जद्दोजहद के बाद पम्पिंग सेट से मात्र चालीस-पचास बीघा भूमि से पानी निकालने में सफल हुए है। स्थानीय प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी है, लेकिन हुक्मरानों को किसानों की पीड़ा से कोई सरोकार नही है। किसानों कहना है कि हलका लेखपाल मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले चुका है, लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात बने हुए है। आज भी जगदीश, बिलेन्द्र, विनोद, खिला, नेपाल, विकास, बिशम्बर, पीरू, ईशाक, वसी, इमरान, यूसुफ, जनेश्वर, यशपाल आदि किसानों के खेतों में झील का गंदा पानी भरा हुआ है। इनमें से कुछ किसान ऐसे भी है, जिनके खेतों में दो से पांच फीट तक पानी का भराव है। जल भराव के कारण किसान आगामी फसल की तैयारी भी नही कर पा रहे है। मामले के सम्बंध में जानकारी करने के लिए कैराना एसडीएम के सरकारी नंबर पर कॉल की गई, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं की।
जिला मुख्यालय पर अटका पड़ा प्रस्ताव
स्थानीय प्रशासन द्वारा झील की मेड़ पक्की कराने के लिए जिला मुख्यालय पर प्रस्ताव भेजने का दावा किया गया है। हालांकि, जिला मुख्यालय पर भेजा गया प्रस्ताव पिछले कई माह से वित्तीय कारणों के चलते अटका पड़ा है। इसके अलावा किसानों को झील के पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। झील के पानी को ट्रीट करके पाइपलाइन के द्वारा यमुना नदी तक पहुंचाया जायेगा। किसान प्रशासन से पाइपलाइन दबवाने के कार्य में तेजी लाने के लिए गुहार लगा चुके है।
दिशा की बैठक में नाराजगी जता चुके हैं सांसद
विगत दिनों जिला मुख्यालय पर हुई दिशा की बैठक में कैराना सांसद प्रदीप चौधरी ने भी झील के पानी से किसानों को होने वाले नुकसान पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने अधिकारियों से नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत मामौर झील पर बनाये जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जताई थी। साथ ही, अधिकारियों को किसानों की समस्या को ध्यान में रखते हुए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य शीघ्रता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए थे।

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