Maharashtra

महिला डॉक्टर की मौत पर गहराया रहस्य, पुलिस अधिकारी पर बलात्कार का आरोप, मुंडे-दानवे बोले- SIT जांच हो!

महाराष्ट्र के सतारा में आत्महत्या करने वाली और एक पुलिस अधिकारी पर चार बार बलात्कार का आरोप लगाने वाली डॉक्टर ने चार पन्नों का एक सुसाइड लेटर भी छोड़ा है, जिसमें उसने बताया है कि पुलिस मामलों में आरोपियों के फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए उस पर दबाव डाला गया और मना करने पर उसे परेशान किया गया। उसने अपने लेटर में लिखा है कि यह दबाव न केवल पुलिस अधिकारियों ने डाला, बल्कि एक मामले में तो एक सांसद और उनके दो निजी सहायकों ने भी डाला।

महाराष्ट्र पुलिस ने शनिवार को कहा कि उसने सतारा जिले के फलटण तालुका में 29 वर्षीय महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में दो आरोपियों में से एक प्रशांत बनकर को गिरफ्तार कर लिया है। सतारा पुलिस के एसपी तुषार दोशी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि प्रशांत बनकर को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा। सतारा आत्महत्या मामले का दूसरा आरोपी, पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदने अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है। मृतका की हथेली पर मराठी में लिखे एक नोट में आरोप लगाया गया है कि फलटण सिटी पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई) गोपाल बदने ने उसके साथ चार बार बलात्कार किया और उसके मकान मालिक के बेटे प्रशांत बनकर ने उसे पाँच महीने तक शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

महाराष्ट्र के सातारा जिले में एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत महिला चिकित्सक ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि महिला चिकित्सक ने अपनी हथेली पर एक ‘सुसाइड नोट’ छोड़ा है, जिसमें उसने एक पुलिसकर्मी पर बलात्कार और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि बीड जिले से ताल्लुक रखने वाली 28 वर्षीय महिला चिकित्सक फलटण तहसील के एक सरकारी अस्पताल में काम करती थी। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सक का शव बृहस्पतिवार देर रात फलटण में एक होटल के कमरे में फंदे से लटका मिला।

पुलिस ने बताया कि ‘सुसाइड नोट’ में महिला चिकित्सक ने लिखा है कि उपनिरीक्षक गोपाल बदाने ने उसके साथ कई बार बलात्कार किया, जबकि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत बांकर ने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। पुलिस ने कहा कि बदाने और बांकर के खिलाफ बलात्कार और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।

राज्य के पूर्व मंत्री मुंडे ने कहा कि अगर महिला के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी शिकायतों को – जैसा कि आरोप लगाया गया है – सिर्फ़ इसलिए नजरअंदाज़ किया क्योंकि उसका एक खास उपनाम था या वह बीड जिले की रहने वाली थी, तो यह एक गंभीर मामला है।

बीड से राकांपा नेता ने ‘एक्स’ पर लिखा, , ‘‘पूरे मामले की एसआईटी जांच होनी चाहिए और मुकदमा त्वरित अदालत में चलाया जाना चाहिए।’’ विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता दानवे ने भी महिला के मराठवाड़ा मूल का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘जन्म से ही संघर्ष करके जीवन में आगे बढ़ने वाली मराठवाड़ा की इस बेटी की आत्महत्या दर्शाती है कि रक्षक ही भक्षक बन गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि सतारा ज़िले के बाहर के अधिकारियों की एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जानी चाहिए।

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