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मध्य प्रदेश में सर्दी का सितम, 15 दिन से ठिठुरन जारी, 12 शहर 10 डिग्री से नीचे

भोपाल। पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी का असर अब मध्य प्रदेश पर गहराई से देखने को मिल रहा है। पिछले पंद्रह दिनों से प्रदेश कड़ाके की ठंड की चपेट में है। बीते 24 घंटे में भोपाल, इंदौर समेत 12 प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। प्रदेश का सबसे कम तापमान राजगढ़ में 7.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ जबकि जबलपुर के भेड़ाघाट में घना कोहरा पसरा रहा। शुक्रवार को भी मौसम का यही तेवर जारी रहने की संभावना है। हवाओं का रुख बदलने से तापमान में मामूली उछाल जरूर आया है लेकिन मौसम वैज्ञानिक इसे अस्थायी राहत मान रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, 22 नवंबर से दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया सक्रिय होगा, जो 24 नवंबर तक अवदाब में बदल सकता है। इससे हवा की दिशा बदलकर नमी बढ़ेगी, और कई शहरों में सुबह कोहरा गहरा सकता है। हालांकि, जैसे ही यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, ठंड का दूसरा चरण और अधिक तीव्रता के साथ लौट सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले तीन-चार दिन तक धुंध की स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद तापमान में गिरावट तेज होगी और दिसंबर की शुरुआत में न्यूनतम तापमान कई शहरों में 5-6 डिग्री तक जा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने नागरिकों को ठंड से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है।

उल्‍लेखनीय है कि गुरुवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर, नरसिंहपुर और शिवपुरी में शीतलहर चली जबकि खंडवा व खरगोन में तीव्र शीतलहर का असर देखने को मिला। दिन में उज्जैन का अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री रहा, लेकिन रात की ठिठुरन ने लोगों को गर्म कपड़ों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया। राजधानी भोपाल में पिछले दस दिनों से लगातार कोल्ड वेव का असर बना हुआ है और मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए भी शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।

प्रदेश में नवंबर की रिकॉर्डतोड़ सर्दी

इस वर्ष नवंबर की ठंड ने कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, भोपाल में नवंबर की ठंड ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इंदौर में भी पिछले 25 वर्षों का सबसे ठंडा नवंबर दर्ज किया जा रहा है। मालवा–निमाड़ क्षेत्र सामान्य से अधिक ठंड झेल रहा है। मौसम विभाग ने पूरे महीने में ठंड का दौर रुक-रुककर जारी रहने की संभावना जताई है। राज्‍य के हिल स्टेशन पचमढ़ी इस बार भी ठंड के मामले में शीर्ष पर है। यहाँ 7.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ, जो प्रदेश में राजगढ़ के बाद दूसरा सबसे कम रहा। शाजापुर में पारा 7.8 डिग्री, शिवपुरी में 8 डिग्री, नौगांव (छतरपुर) में 8.3 डिग्री, खंडवा 8.4 डिग्री, नरसिंहपुर 8.8 डिग्री, उमरिया व खरगोन 9 डिग्री और रायसेन में पारा 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। बात यदि बड़े शहरों की करें तो राजधानी भोपाल में 9.2 डिग्री, इंदौर आठ डिग्री, ग्वालियर 11.9 डिग्री, उज्जैन 10.5 डिग्री और जबलपुर 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

हवाओं का रुख बदला, राहत सीमित

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जो मामूली गर्माहट महसूस हो रही है, वह लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी पी.के. रायकवार का कहना है, “हवाओं का रुख पूर्वी होने से तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह राहत अस्थायी है। जैसे ही हवाएँ फिर उत्तर–पश्चिम दिशा में लौटेंगी, ठंड का नया दौर शुरू हो जाएगा। हवा में नमी बढ़ रही है, इसलिए कोहरा और धुंध अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। दृश्यता भी प्रभावित हो सकती है।” उन्होंने कहा कि नवंबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत में तापमान में तेजी से गिरावट शुरू होने की पूरी संभावना है।

मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने भी मौजूदा स्थिति पर चेतावनी भरा संकेत दिया। उनका कहना है, “22 नवंबर को बंगाल की दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में लो प्रेशर एरिया बन रहा है, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव मध्यप्रदेश के मौसम पर पड़ेगा। हवाओं के पैटर्न में बदलाव होगा, जिससे कई शहरों में सुबह का कोहरा और घना हो सकता है। यह मौसमी उतार-चढ़ाव तीन-चार दिन चलेगा, इसके बाद दोबारा ठिठुरन बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दिसंबर का महीना सामान्य से अधिक ठंडा हो सकता है। “मौजूदा परिस्थितियाँ यही कह रही हैं कि इस बार दिसंबर में पाला पड़ने की संभावना बढ़ी है। किसानों को गेहूँ–चना जैसी संवेदनशील फसलों की सुरक्षा के लिए शुरू से ही सावधानी बरतनी होगी।”

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