
रामेश्वरम। तमिलनाडु के पूर्वी तट पर मछलियों के प्रजनन की सुविधा के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर 61 दिनों का वार्षिक प्रतिबंध गुरुवार मध्यरात्रि से शुरू हो गया।
आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार द्वारा उत्तर में तिरुवल्लूर जिले से दक्षिण में कन्याकुमारी जिले तक, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन नियमन अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत लागू प्रतिबंध 15 अप्रैल से 14 जून तक प्रभावी रहेंगे। प्रतिबंधों का उद्देश्य क्षेत्र में समुद्री पारिस्थितिकी में मछलियों का प्रजनन और मछली स्टॉक का संरक्षण करना है।
मशीनीकृत नौकाओं वाले मछुआरों को प्रजनन के मौसम के दौरान ट्रॉलरों से समुद्री जीवन को होने वाली गड़बड़ी से बचने के लिए समुद्र में नहीं जाने का निर्देश दिया गया है।
इस दौरान पारंपरिक ‘कटमरैन’और देशी नौकाओं से मछली पकड़ने की छूट दी गई है।
तमिलनाडु मत्स्य पालन नियमन अधिनियम 1983 के प्रावधानों के तहत प्रतिबंध आदेश का उल्लंघन पर नावों के लाइसेंस और उनकी डीजल सब्सिडी रद्द करने सहित मशीनीकृत नाैका मछुआरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सूत्रों ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल, तमिलनाडु समुद्री पुलिस और मत्स्य विभाग जैसी प्रवर्तन एजेंसियां प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध मछली पकड़ने पर अंकुश लगाने के लिए संयुक्त गश्त में शामिल होंगी।
यह प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रथाओं के अनुरूप है। अमेरिका, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने हर साल इसी तरह के प्रतिबंध लगाए हैं और भारत में, पहली बार 1988 में यह प्रतिबंध केरल में लगाये गए थे।
प्रतिबंध के कारण रामेश्वरम में 800 से ज्यादा मशीनीकृत नावों को घाट पर खड़ा किया गया था।
तमिलनाडु सरकार ने प्रतिबंध अवधि के दौरान प्रत्येक मछुआरे को मासिक सहायता 5,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दी है।
राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि श्रीलंका द्वारा हिरासत में लिए गए मछुआरों के परिवारों को रिहा होने तक 250 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे।




