
मीरापुर। शीतला माता मंदिर में चल रही शिव महापुराण के सातवे दिन कथा व्यास ने कहा कि भगवान भोले की शरण में जाकर सभी जीव मिलजुलकर सहज भाव से रहने की शिक्षा लेते हैं।
शिव महापुराण के सातवे दिन कथा व्यास प्रदीप मणि जी ने कहा कि भगवान शंकर के निकट जाने से लोगो में मिलजुलकर रहने का सहजभाव उत्पन्न हो जाता है। भगवान शंकर ही जीवन की पूर्णता है। इनकी पूजा से शांति व उर्जा प्राप्त होती है। इन्होने कहा कि भगवान शंकर के परिवार में उनका वाहन नंदी, मां पार्वती का वाहन शेर, गणेश का वाहन चूहा, कार्तिके का वाहन मोर है जिसमें सर्प और मोर की शत्रुता जग जाहिर है लेकिन भोले की शरण में पहंुच कर सभी जीव बैर भाव भूलकर आपस में प्रेम से रहते हैं। कथा के दौरान आज शंखचूड व अंधक की कथा बताकर तुलसी उत्पत्ती के बारे में बताया गया व तुलसी के द्वारा किन किन देवताओं के पूजा करने की विधि बताई गयी। उन्होने बताया कि भक्तो को भूलकर भी गणेश जी को तुलसी नही चढानी चाहिए ऐसा करने से घर में अमंगल होने की संभावना प्रबल हो जाती है। जगद गुरू राम भद्राचार्य जी महाराज द्वारा स्थापित राघव परिवार के पदाधिकारियो ने आज कथा स्थल पर पहंुच कर कथा व्यास को शाल व मालाऐ पहनाकर सम्मानित किया। सम्मानित करने वाले वासुदेव शर्मा, दिनेश कौशिक, विरेन्द्र गुप्ता, प्रतीक देव वत्स, घनश्याम दास अग्रवाल, अजय दूबे, विवेक वर्मा उर्फ सोनू आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर शीतला माता मंदिर के प्रबंधक अनिरूद्ध शारदा को भी कथा व्यास प्रदीप मणि द्वारा सम्मानित किया गया। कथा में अनिरूद्ध शारदा, नवनीत शारदा, मां. चन्द्रपाल सिंह, संजय माहेश्वरी, अमित डागा, जितेन्द्र डागा, विकास शर्मा उर्फ मोंटू, नितिन शर्मा, नीरज शारदा, प्रवीण अग्रवाल, प्रमोद शर्मा, नवनीत तायल, मुकेश शारदा, राकेश कौशिक, रूचिन शारदा, राजन माहेशवरी आदि सक्रिय रहे।




