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प्रधानमंत्री तीन देशों की यात्रा पर रवाना, जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान से संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की तीन देशों की यात्रा पर रवाना हो गए। प्रधानमंत्री ने यात्रा पर रवाना होने से पहले अपना वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा कि ये तीनों देश भारत के साथ प्राचीन सभ्यतागत संबंधों के साथ-साथ समकालीन द्विपक्षीय साझेदारी साझा करते हैं। यह यात्रा भारत के कूटनीतिक और वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री अपनी यात्रा की शुरुआत जॉर्डन से करेंगे, जहां वे किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन के निमंत्रण पर अमान जाएंगे। यह यात्रा भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ऐतिहासिक मानी जा रही है। प्रधानमंत्री किंग अब्दुल्ला द्वितीय, जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन और क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही वे भारत–जॉर्डन संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे।

जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री इथियोपिया की यात्रा पर जाएंगे। यह उनकी इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। उन्होंने बताया कि अदीस अबाबा अफ्रीकी संघ का मुख्यालय भी है, जिसे भारत की जी 20 अध्यक्षता के दौरान 2023 में जी 20 का स्थायी सदस्य बनाया गया था। प्रधानमंत्री इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली से व्यापक चर्चा करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे, जहां ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में भारत की यात्रा और ग्लोबल साउथ के लिए भारत–इथियोपिया साझेदारी के महत्व पर अपने विचार साझा करेंगे।

यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ओमान पहुंचेंगे। यह दौरा भारत–ओमान राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। मस्कट में प्रधानमंत्री ओमान के सुल्तान से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी तथा व्यापारिक व आर्थिक सहयोग को और सशक्त बनाने पर चर्चा करेंगे। वे ओमान में बसे भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे, जिन्होंने देश के विकास और भारत–ओमान संबंधों को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह तीन देशों की यात्रा भारत के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करेगी।

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