

गुडग़ांव (अशोक): पितृदोष से मुक्ति के लिए लोगों ने शनिवार को
बैसाख माह की अमावस्या पर दान आदि दिया। इस अमावस्या शनिचरी अमावस्या या
शनि अमावस्या भी कहा जाता है। बैसाख अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में
स्नान करने और दान करने की परंपरा रही है। धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख
है कि बैसाख माह की इस अमावस्या पर दान आदि करने से पितृदोष से मुक्ति
मिल जाती है। लोगों ने नित कार्यों से निवृत होकर मंदिरों व अपने घरों
में भी दान आदि दिया। उन्होंने पितरों के लिए जल में काला तिल और फूल
मिलाकर पितरों का तर्पण भी किया। बताया जाता है कि इससे पितृ प्रसन्न हो
जाते हैं और उनके तृप्त होने से पितृ दोष भी दूर हो जाता है। पंडित मुकेश
शर्मा का कहना है कि बैसाख अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए पितरों
के लिए पिंडदान भी किया जाता है तथा उनकी आत्म तृप्ति के लिए श्राद्ध
कर्म भी किए जा सकते हैं। लोगों ने जहां दान दिया, वहीं ब्राह्मणों को
भोजन भी कराया। बहुत से लोगों ने पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल के
वृक्ष को जल अर्पित करते हुए दीपक दान भी किया।




