पिछले 14 माह से प्रदेश की पंचायतें चल रही हैं भंग बिना पंचायतों के कैसा पंचायती राज दिवस? सरकार शीघ्र कराए पंचायतों के चुनाव
जिले के संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान संतोख सिंह ने पंचायती राज दिवस को लेकर कहा है कि प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई

गुडग़ांव। जिले के संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान संतोख सिंह ने पंचायती राज दिवस को लेकर कहा है कि प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है तथा पंचायतों के चुनाव न होने से गांवों के विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प हो गए हैं। बिना पंचायतों के कैसे पंचायती राज दिवस मनाएं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पंचायतों के चुनाव न कराने से ग्रामीणों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। ग्राम विकास के लिए आवंटित 2 हजार 400 करोड़ रुपए का वर्ष 2021-22 का बजट इस्तेमाल न होने के कारण लैप्स हो गया है। सरकारी पंचायती राज व्यवस्था को सरकार कमजोर करने में लगी है। किसान नेता का कहना ह ेकि पंचायतें लोकतंत्र की नीवं हैं। उन्होंने भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार पर ग्रामीणों के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने जानबूझकर पंचायतों के चुनाव पिछले 14 माह से लटकाए हुए हैं और पंचायतों के अधिकार सरकारी अधिकारियों के हाथों में सौंप दिए हैं। प्रदेश की 6 हजार 200 से अधिक पंचायतें पिछले 14 माह से भंग चली आ रही हैं। पंचायतों के न होने के कारण ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी सरकारी अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से प्रश्र किया है कि बिना पंचायतों के कैसा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 ई के अनुसार सरकार पंचायती चुनावों को समय पर कराने के लिए बाध्य है, लेकिन सरकार ने पंचायती चुनावों को टालकर संवैधानिक प्रावधानों की उल्लंघना की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रदेश की पंचायतों के चुनाव कराए जाएं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य हो सकें और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान भी हो सके।




