रणथम्भौर की फलौदी रेंज से तीन नवम्बर को ट्रेकुंजाइज कर कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के सेल्जर इलाके में शिफ्ट करने के बाद अब बाघ के पुराने इलाके में दूसरे बाघ ने अपना कब्जा जमा लिया है। रणथम्भौर के जोन नंबर 9 को बाघ टी-129 ने कवर कर लिया है। इसके पेराफेरी एरिया कुंवालजी में बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। यह एरिया भले ही रणथम्भौर की पेराफेरी में आता है, लेकिन बूंदी जिले का हिस्सा है। गौरतलब है कि पूर्व में जोन नंबर 9 कुंवालजी के जंगल को टी-110 ने अपनी टेरिटरी बनाया हुआ था। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में इस क्षेत्र में अधिक बाघों का मूवमेंट नहीं है। ऐसे में बाघ को किसी अन्य बाघ से चुनौती मिलने और टेरेटरी को लेकर संघर्ष होने की भी कोई आशंका नहीं है। हालांकि पूर्व में बाघ टी-108 ने भी इस ओर कदम बढ़ाए थे लेकिन अब वह भी यहां से दूसरे इलाके में चला गया है।
पहले भी कुण्डाल से फलौदी रेंज में पहुंचा था टी-129
पूर्व मेंबाघ टी-129 का मूवमेंट कुण्डाल वनक्षेत्र में रहता था, लेकिन नवम्बर 2021 में यह बाघ टेरेटरी की तलाश में कुण्डाल से निकलकर फलौदी रेंज में पहुंच गया था। लेकिन टी-110 ने बाघ टी-129 को खदेड़ दिया था। इसके बाद भी टी.129 जोन नंबर 9 में गया,लेकिन टी-110 के डर से वहां टिक नहीं पाया। उस समय बाघ टी-129 की घायल अवस्था में एक फोटो वन विभाग के फोटो ट्रैप कैमरे में भी कैद हुई थी। टेरिटरी की तलाश में निकला बाघ टी.129 उस समय सुर्खियों में आया जब दो माह तक इसका कोई मूवमेंट ही नहीं मिला।
यह है बाघ टी-129 का इतिहास
बाघ टी-129 रणथम्भौर बाघिन लाडली यानि टी-8 का शावक है। इसकी उम्र करीब 4 साल है। पहले इसका विचरण मां के साथ जोन छह में ही रहता था। अब व्यस्क होने के साथ ही टेरेटरी की तलाश में यह बाघ रणथम्भौर के आरओपीटी की रेंज से निकलकर रणथम्भौर के फलौदी रेंज में जा पहुंचा है।वहीं टी-129 का भाई टी-128 अभी भी रणथम्भौर की पेराफेरी में ही विचरण कर रहा है। जबकि ***** टी-127 का मूवमेंट जोन छह व सात में बना हुआ है।
इनका कहना है…
फलौदी रेंज के जोन नौ में टी-110 के मुकंदरा जाने के बाद टी-129 ने कवर कर लिया है। बाघ की नियमित ट्रैकिंग की जा रही है।




