मुजफ्फरनगर शामली

किसानों के साथ भेदभाव, गन्ना भुगतान में देरी और सड़क निर्माण में लापरवाही का मुद्दा विधान परिषद में

शामली। लखनऊ में माननीय किरण पाल कश्यप, सदस्य विधान परिषद ने विधान परिषद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की गंभीर समस्याओं और जनपद शामली में सड़क निर्माण में हो रही लापरवाही को मजबूती से उठाते हुए सरकार का ध्यान जमीनी हकीकत की ओर आकृष्ट किया।
माननीय किरणपाल कश्यप ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की रीढ़ है, लेकिन आज वही किसान सबसे अधिक संकट में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बजाज ग्रुप की चीनी मिलों द्वारा पिछले वर्ष का भी गन्ना भुगतान आज तक नहीं किया गया है। कई स्थानों पर किसानों का भुगतान एक-एक वर्ष तक लंबित रहता है, और विलंब के बावजूद किसानों को ब्याज तक नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में किसान अपने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की शादी कैसे करे—यह एक गंभीर सवाल है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। पूर्ववर्ती सरकार के समय जब चीनी का भाव 27–28 रुपये प्रति किलो था, तब गन्ने का मूल्य 370 रुपये प्रति क्विंटल था। आज चीनी के दाम काफी बढ़ चुके हैं, इसके बावजूद गन्ने का मूल्य मात्र 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, वह भी बहुत देर से।
माननीय किरणपाल कश्यप ने कहा कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में गन्ने का मूल्य 420 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की पैदावार और रिकवरी प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद यहाँ के किसानों को कम मूल्य दिया जाना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है।
उन्होंने आलू किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि आलू के लिए न तो पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज हैं और न ही कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है, जिससे किसान भारी नुकसान झेलने को मजबूर हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि गन्ने के बाद उगाई जाने वाली धान और गेहूं की फसलों को भी वही मूल्य दिया जाए, जो हरियाणा में मिलता है।
माननीय किरणपाल कश्यप ने कहा कि देश के सच्चे चौकीदार किसान हैं, जो रात-रात भर खेतों की रखवाली करते हैं। इसके लिए सरकार को आवारा पशुओं से बचाव हेतु पर्याप्त गौशालाओं का निर्माण कराना चाहिए। साथ ही खेतों के ऊपर से गुजर रहे जर्जर बिजली तारों को शीघ्र बदला जाए तथा फसल नुकसान पर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
इसी क्रम में माननीय किरण पाल कश्यप ने जनपद शामली के थानाभवन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भैसवाल से ग्राम मालैंडी तथा झिंझाना से ग्राम पिरखेड़ा तक सड़क निर्माण का मुद्दा भी विधान परिषद में उठाया। उन्होंने विधान परिषद के तृतीय सत्र–2025 में तारांकित प्रश्न संख्या–4 के अंतर्गत पूछा कि दोनों सड़कों का निर्माण दर्शाए जाने के बावजूद बीच का लगभग 1.5 किलोमीटर का हिस्सा आज भी कच्चा क्यों है।
सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि झिंझाना से ग्राम पिरखेड़ा मार्ग का 1.190 किलोमीटर अवशेष भाग 18 मार्च 2025 को स्वीकृति के बाद पूर्ण कर लिया गया है।
सरकार के इस उत्तर पर माननीय किरणपाल कश्यप ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब आज भी स्थानीय ग्रामीण कच्ची सड़क से आवागमन करने को मजबूर हैं, तो निर्माण कार्य पूर्ण होने का दावा पूरी तरह भ्रामक है। यह मामला कागज़ों में सड़क निर्माण दिखाकर जमीनी सच्चाई को छिपाने का प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में इस मार्ग से गुजरना अत्यंत जोखिम भरा हो जाता है। स्कूली बच्चों, किसानों, बुजुर्गों और मरीजों को रोज़ाना जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। इसके बावजूद विभाग द्वारा कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।
अंत में माननीय किरण पाल कश्यप ने सरकार से मांग की कि किसानों के बकाया भुगतान, फसल मूल्य निर्धारण और सड़क निर्माण जैसे जनहित के मुद्दों पर तत्काल ठोस कदम उठाए जाएँ तथा मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कराकर अधूरे कार्य शीघ्र पूरे कराए जाएँ।

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