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काले गन्ने की खेती के लिए पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसानों को प्रेरित करेंगे-समाजसेवी आर०आर०डी०उपाध्याय

काला गन्ना गन्ने की वह प्रजापति है। जिसका उत्पादन भारत वर्ष में बहुत कम होता है। गन्ने का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले पश्चिम उत्तर प्रदेश में तो गन्ने की इस प्रजाति का उत्पादन शून्य है। क्योंकि शुगर फैक्ट्रीयां इसका क्रय नहीं करती और पश्चिम उत्तर प्रदेश का किसान 90% गन्ने का उत्पादन शुगर फैक्ट्रीयां के लिए करता है।
पश्चिम उत्तर प्रदेश सहित सम्पूर्ण भारतवर्ष में दिन-प्रतिदिन गन्ने के रस, गुड-शक्कर व खाण्ड़ के बढते हुए उत्पादन और घटती हुई गुणवत्ता ध्यान में रखकर समाजसेवी मा० राकेश सरोहा व आँखें के निदेशक समाजसेवी आर०आर०डी० उपाध्याय ने काले गन्ने का उत्पादन करने के लिए किसानों को प्रेरित करते हुए पश्चिम उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और सहारनपुर में कुछ किसानों को प्रयोग के लिए काले गन्ने का बीज का वितरित किया।
मास्टर राकेश सरोहा ने बताया कि फरवरी के आखिरी सप्ताह में किसानों को काले गन्ने का बीज पुनः उपलब्ध कराया जायेगा।
समाजसेवी आर०आर०डी० उपाध्याय ने बताया कि साधारण गन्ने की अपेक्षा काले गन्ने में कैल्सियम, पोटासियम, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस सहित कई अन्य पोषिक अधिक मात्रा में पाये जाते है। काला गन्ना साधारण गन्ने की तुलना मे महंगा और मुनाफा देने वाला है। जो स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त लाभकारी इसीलिए किसानों को काले गन्ने की खेती कर करनी चाहिए।

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