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ईडी प्रमुख के कार्यकाल विस्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मनाने वाले भ्रमित हैं : शाह

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संजय कुमार मिश्रा को दिए गए तीसरे विस्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पहली प्रतिक्रिया में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग खुश हो रहे हैं, वे भ्रमित हैं।

शाह ने एक ट्वीट में कहा : “ईडी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मनाने वाले लोग विभिन्न कारणों से भ्रमित हैं। सीवीसी अधिनियम में संशोधन, जो संसद द्वारा विधिवत पारित किया गया था, को बरकरार रखा गया है। जो लोग भ्रष्ट हैं और कानून के गलत पक्ष पर हैं, उन पर कार्रवाई करने की ईडी की शक्तियां वही रहेंगी।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ईडी एक ऐसी संस्था है जो किसी एक व्यक्ति से ऊपर उठती है और अपने मुख्य उद्देश्य को प्राप्त करने पर केंद्रित है – यानी मनी लॉन्ड्रिंग के अपराधों और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन की जांच करना।

शाह ने कहा, “इस प्रकार, ईडी निदेशक कौन है – यह महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि जो कोई भी इस भूमिका को ग्रहण करेगा वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले हकदार वंशवादियों के एक आरामदायक क्लब के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पर ध्यान देगा।”

उनकी यह टिप्पणी मंगलवार को शीर्ष अदालत द्वारा 2021 में  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाए जाने को “अवैध” करार दिए जाने के बाद आई है।

हालांकि, न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें 31 जुलाई तक पद पर बने रहने की अनुमति दी।

ईडी निदेशक का कार्यकाल नवंबर 2023 में समाप्त होने वाला था।

इस बीच, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि ईडी निदेशक को दिया गया एक्सटेंशन पूरी तरह से अवैध है।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने मीडियाकर्मियों से कहा : “मिश्रा का कार्यकाल विस्तार पूरी तरह से अवैध है, यह सुप्रीम कोर्ट कह रहा है। यही बात कांग्रेस पार्टी पहले दिन से कह रही थी। इसलिए, कांग्रेस का रुख आज साबित हो चुका है कि ईडी निदेशक का कार्यकाल अवैध तरीकों से बढ़ाने का मकसद क्‍या था, इसलिए यह फैसला वास्तव में यह सरकार के चेहरे पर एक स्पष्ट तमाचा है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गृहमंत्री के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “गृहमंत्री उस एजेंसी पर टिप्पणी क्यों कर रहे हैं जो तकनीकी रूप से वित्त मंत्रालय को रिपोर्ट करती है? क्या इससे यह नहीं पता चलता कि दो लोगों को छोड़कर बाकी मंत्रिमंडल बेरोजगार है? यदि ईडी का निदेशक कौन है, इससे आपके लिए कोई फर्क नहीं पड़ता, तो वर्तमान पदाधिकारी को दो बार सेवा विस्तार क्यों दिया गया और आपकी सरकार तीसरे विस्तार के लिए क्यों लड़ रही है?”

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