
जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कांगो में स्वास्थ्य अधिकारियों ने उत्तर-पश्चिमी भूमध्य प्रांत के मबांडाका में एक मामले की पुष्टि के बाद फिर से इबोला महामारी के दस्तक देने की घोषणा की है।
यह वर्ष 2018 के बाद से इस देश में इबोला का तीसरा प्रकोप होगा और 1976 के बाद से 14वां है।
अफ्रीका के डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक मत्शिदिसो मोएती ने शनिवार को कहा, “ हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। इस बीमारी की शुरुआत दो सप्ताह से हो चुकी है और हम अब कैच-अप खेल रहे हैं। सकारात्मक खबर यह है कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कांगो के पास इबोला महामारी को शीघ्रता से नियंत्रित करने का दुनिया में किसी और की तुलना में अधिक अनुभव है।”
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अब तक पाया गया मामला एक 31 वर्षीय व्यक्ति का था, जिसने पांच अप्रैल को लक्षणों का अनुभव करना शुरू किया था। उसे गहन देखभाल के लिए 21 अप्रैल को इबोला उपचार केंद्र में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसी दिन बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
डब्ल्यूएचओ ने कहा,“ इबोला के प्रकोप को रोकने के प्रयास पहले से ही चल रहे हैं।”
मोइती ने कहा,“मबांडका में कई लोगों को पहले से ही इबोला के टीके लगाया जा चुके हैं, जिससे बीमारी के प्रभाव को कम करने में मदद मिलनी चाहिए। वर्ष 2020 के प्रकोप के दौरान जिन लोगों को टीका लगाया गया था, उन्हें फिर से टीका लगाया जाएगा।”
सीएनएन के अनुसार, कांगो में किसी भी अन्य देश की तुलना में इबोला का सर्वाधिक प्रकोप हुआ है क्योंकि वायरस पहली बार 1976 में इस देश के उत्तरी क्षेत्र में इबोला नदी के पास पाया गया था।




